तिरुवनंतपुरम: मई 2023 में ड्यूटी के दौरान हुई युवा डॉक्टर वंदना दास की नृशंस हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था। शनिवार को अदालत ने दोषी संदीप को उम्रकैद और अतिरिक्त 30 साल की सजा सुनाई, लेकिन डॉक्टर समुदाय इससे संतुष्ट नहीं है।
अदालत का फैसला (कोल्लम जिला एवं सत्र न्यायालय):
दोषी: जी. संदीप (एक स्कूल शिक्षक, जिसे पुलिस मेडिकल जांच के लिए लाई थी)।
सजा: उम्रकैद (Life Imprisonment)।
अतिरिक्त सजा: विभिन्न धाराओं के तहत कुल 30 वर्ष की कैद। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोषी पहले 30 साल की सजा काटेगा, उसके बाद उसकी उम्रकैद शुरू होगी।
अपराध का तरीका: दोषी ने अस्पताल में मौजूद सर्जिकल कैंची से डॉ. वंदना पर ताबड़तोड़ हमला कर उनकी हत्या कर दी थी।
IMA और डॉक्टरों की मांगें:
अधिकतम सजा (मृत्युदंड): IMA की राज्य इकाई ने कहा कि यह "दुर्लभतम" (Rarest of rare) मामला था, इसलिए दोषी को फांसी होनी चाहिए थी। उन्होंने सरकार से उच्च न्यायालय में अपील दायर करने का आग्रह किया है।
अस्पताल "संरक्षित क्षेत्र" (Protected Zones): डॉक्टरों ने मांग की है कि अस्पतालों को वार-ज़ोन के बजाय सुरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाए।
सुरक्षा ऑडिट और बल: केरल सरकार चिकित्सा अधिकारी संघ (KGMOA) ने सुझाव दिया है कि:
अस्पतालों में राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल (SISF) तैनात हो।
पुलिस सहायता केंद्र (Police Outposts) अनिवार्य हों।
अस्पतालों के आपातकालीन विभागों में भीड़भाड़ कम करने के लिए कड़े नियम बनें।
जांच की सराहना और सुरक्षा पर चिंता:
जहाँ एक ओर KGMOA ने पुलिस की त्वरित और वैज्ञानिक जांच की तारीफ की, वहीं IMA ने चेतावनी दी है कि यदि "दृष्टांतमूलक" (Exemplary) सजा नहीं दी गई, तो स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा पर अंकुश लगाना नामुमकिन होगा। हाल ही में थमारास्सेरी तालुक अस्पताल में एक और डॉक्टर पर हुए हमले ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है।
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