छत्तीसगढ़ विधानसभा में पारित नए धर्मांतरण विरोधी कानून के खिलाफ मसीही समाज ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। शनिवार, 28 मार्च 2026 को बड़ी संख्या में समाज के लोग तूता धरना स्थल पर एकत्रित हुए। आंदोलनकारियों का आरोप है कि यह कानून उनकी धार्मिक स्वतंत्रता और सेवा कार्यों पर अंकुश लगाने का एक प्रयास है। जैसे ही प्रदर्शनकारी राजभवन की ओर बढ़े, भारी पुलिस बल ने उन्हें बैरिकेड्स लगाकर बीच में ही रोक लिया।

मसीही समाज के विरोध के मुख्य कारण: प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि कानून की आड़ में उनके पादरियों और सेवा संस्थानों को निशाना बनाया जा सकता है। उन्हें डर है कि 'लालच' और 'प्रलोभन' जैसे शब्दों की व्याख्या इतनी व्यापक है कि सामान्य सेवा कार्यों (जैसे शिक्षा और स्वास्थ्य) को भी धर्मांतरण की श्रेणी में खड़ा किया जा सकता है।

सियासी बयानबाजी का दौर:

  • कांग्रेस का हमला: पूर्व सत्ताधारी दल कांग्रेस ने इस पूरे मामले को भाजपा का "राजनीतिक प्रोपेगेंडा" करार दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि समाज को बांटने और असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के सख्त कानून लाए जा रहे हैं।

  • भाजपा का पलटवार: भाजपा ने स्पष्ट किया है कि वे किसी विशेष धर्म के खिलाफ नहीं हैं। पार्टी का स्टैंड है कि "धर्मांतरण नहीं, बल्कि लालच और प्रलोभन देकर कराया गया धर्मांतरण अपराध है।" सरकार का कहना है कि यह कानून गरीब और भोले-भाले लोगों की रक्षा के लिए 'कवच' की तरह काम करेगा।

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