बिलासपुर: अतिरिक्त लोक अभियोजक देवेंद्र राव के अनुसार, यह मामला 8 नवंबर 2014 को तखतपुर ब्लॉक के पेंडारी स्थित एक निजी अस्पताल में आयोजित शिविर से संबंधित है।
1. अदालत का फैसला और सजा:
मुख्य सजा: डॉ. आर.के. गुप्ता को गैर-इरादतन हत्या के तहत दो साल के कारावास की सजा सुनाई गई है।
आर्थिक दंड: प्रत्येक महिला की मृत्यु के लिए 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
अन्य धाराएं: डॉ. गुप्ता को अन्य आरोपों में 6 महीने और 1 महीने की अतिरिक्त सजा के साथ क्रमशः 500 और 100 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है (सभी सजाएं एक साथ चलेंगी)।
जमानत: सजा की अवधि 3 साल से कम होने के कारण, कानूनी प्रावधानों के तहत अदालत ने डॉ. गुप्ता को तत्काल जमानत दे दी है।
2. लापरवाही और घटना का विवरण:
तेज सर्जरी: अभियोजन पक्ष के अनुसार, तत्कालीन वरिष्ठ सर्जन डॉ. गुप्ता ने मात्र तीन घंटे में 83 महिलाओं का ऑपरेशन किया था, जो अत्यधिक जल्दबाजी और लापरवाही को दर्शाता है।
संक्रमण और मिलावटी दवा: ऑपरेशन के बाद महिलाओं को सेप्टीसीमिया संक्रमण हुआ। जांच में यह भी सामने आया था कि 'सिप्रोसिन' दवा में चूहामार रसायन (Zinc Phosphide) की मिलावट थी।
अस्पतालों में मौत: गंभीर स्थिति में महिलाओं को जिला अस्पताल और CIMS (छत्तीसगढ़ चिकित्सा विज्ञान संस्थान) में भर्ती कराया गया, जहां 12 महिलाओं ने दम तोड़ दिया।
3. दवा कंपनियों को मिली राहत:
पुलिस ने इस मामले में डॉ. गुप्ता के साथ-साथ दो दवा कंपनियों—महावर फार्मा और कविता फार्मास्यूटिकल्स—के पांच संचालकों के खिलाफ भी आरोपपत्र दाखिल किया था। हालांकि, अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में इन सभी पांचों आरोपियों (रमेश, सुमित, राकेश, राजेश और मनीष) को बरी कर दिया है।
प्रमुख जानकारी: एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
| घटना की तारीख | 8 नवंबर 2014 |
| स्थान | पेंडारी, तखतपुर (बिलासपुर) |
| कुल मौतें | 12 महिलाएं |
| मुख्य दोषी | डॉ. आर.के. गुप्ता |
| सजा | 2 साल की जेल |
| बरी हुए आरोपी | 5 (दवा कंपनी संचालक) |
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