कोलकाता (2 अप्रैल 2026): बुधवार को मालदा के सुजापुर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में लगे 7 न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने घंटों बंधक बनाए रखा था, जिन्हें देर रात सुरक्षा बलों ने रेस्क्यू किया।
1. शुभेंदु अधिकारी के 'विस्फोटक' आरोप:
शीर्ष स्तरीय साजिश: अधिकारी ने दावा किया कि यह घेराव कोलकाता में टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा योजनाबद्ध था और मालदा में इसे स्थानीय नेता सबीना यास्मीन ने अंजाम दिया।
केंद्रीय एजेंसी की मांग: उन्होंने मांग की है कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ रोकने के लिए मालदा घटना के सभी दस्तावेज आज आधी रात तक NIA या CBI को सौंप दिए जाएं। उन्होंने इसकी तुलना 'आरजी कर अस्पताल' मामले से करते हुए सबूत नष्ट किए जाने की आशंका जताई।
प्रशासनिक पक्षपात: शुभेंदु ने कोलकाता पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों पर गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी वाले नामांकन जुलूस में "उचित सम्मान न दिखाने" का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से उनके निलंबन की मांग की।
2. ममता बनर्जी का पलटवार:
मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को खारिज करते हुए उल्टा चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को घेरा है:
EC की विफलता: ममता ने कहा कि चूंकि प्रशासन अब चुनाव आयोग के अधीन है, इसलिए न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित न कर पाना आयोग की विफलता है।
अमित शाह पर निशाना: उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पुलिस प्रशासन में फेरबदल कर राज्य में "साजिश" रच रहे हैं और उन्होंने शाह के इस्तीफे की मांग की।
3. 'मध्ययुगीन बर्बरता' और 'फतवा' का आरोप:
शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम की एक कथित घटना का हवाला देते हुए टीएमसी पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और सामाजिक बहिष्कार का आरोप लगाया:
सामाजिक बहिष्कार: उन्होंने दावा किया कि नंदीग्राम में एक भाजपा समर्थक को मस्जिद में प्रवेश से रोकने और सरकारी नल से पानी न लेने देने का 'फतवा' जारी किया गया है।
बर्बरता: उन्होंने इसे "मध्ययुगीन बर्बरता" करार देते हुए कहा कि टीएमसी राजनीतिक विरोधियों को डराने के लिए अलोकतांत्रिक रास्ते अपना रही है।
4. घटना का रणनीतिक विश्लेषण:
| पहलू | राजनीतिक प्रभाव |
| SIR प्रक्रिया | मतदाता सूची में 'नाम हटाए जाने' के मुद्दे पर मालदा और मुर्शिदाबाद में जबरदस्त तनाव है। |
| न्यायिक हस्तक्षेप | पहली बार चुनावी प्रक्रिया में लगे 'न्यायिक अधिकारियों' को निशाना बनाया गया है, जो कानूनी रूप से बहुत गंभीर मामला है। |
| केंद्रीय बल | इस घटना के बाद मालदा के सुजापुर और कालियाचक जैसे क्षेत्रों में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती और बढ़ा दी गई है। |
निष्कर्ष:
शुभेंदु अधिकारी द्वारा इस मामले को NIA को सौंपने की मांग यह दर्शाती है कि भाजपा इस घटना को केवल 'स्थानीय विरोध' नहीं, बल्कि 'संवैधानिक तंत्र की विफलता' के रूप में पेश कर रही है। पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान से पहले, मालदा की यह घटना राज्य में चुनाव आयोग की निष्पक्षता और कानून-व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।
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