नयी दिल्ली (2 अप्रैल 2026): न्यायालय ने मालदा के कालियाचक में हुई घटना को "बेशर्म प्रयास" बताते हुए कहा कि यह सीधे तौर पर उच्चतम न्यायालय के अधिकार को चुनौती है।
1. स्वतंत्र एजेंसी (CBI/NIA) से जांच के निर्देश:
जांच का हस्तांतरण: न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि कल की घटना की जांच तुरंत CBI या NIA को सौंपी जाए।
सीधी रिपोर्टिंग: जांच एजेंसी किसी भी राज्य सरकार को नहीं, बल्कि सीधे उच्चतम न्यायालय को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपेगी।
केंद्रीय बलों की तैनाती: अदालत ने आदेश दिया कि जहाँ भी न्यायिक अधिकारी एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के तहत आपत्तियों का निपटारा कर रहे हैं, वहाँ केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
2. राज्य के शीर्ष अधिकारियों को 'कारण बताओ नोटिस':
न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के प्रशासनिक और पुलिस नेतृत्व की निष्क्रियता पर भारी नाराजगी जताई और निम्नलिखित अधिकारियों को 6 अप्रैल को डिजिटल माध्यम से पेश होने का आदेश दिया:
मुख्य सचिव (Chief Secretary)
पुलिस महानिदेशक (DGP)
जिलाधिकारी (DM), मालदा
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), मालदा
CJI की टिप्पणी: "रात 11 बजे तक आपका कलेक्टर मौके पर नहीं था। मुझे खुद रात 2 बजे तक स्थिति पर नजर रखनी पड़ी और कड़े मौखिक निर्देश देने पड़े।"
3. घटना की भयावहता और 'भोजन-पानी' की मनाही:
न्यायालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा भेजे गए पत्र का संज्ञान लिया, जिसमें बताया गया था:
बंधक: 3 महिलाओं और एक 5 साल के बच्चे समेत 7 अधिकारियों को 9 घंटे तक भीड़ ने घेर कर रखा।
मानवीय गरिमा का उल्लंघन: अधिकारियों को भोजन और पानी तक नहीं दिया गया।
हमला: सुरक्षित निकाले जाने के बाद भी उनके वाहनों पर ईंटों और लाठियों से हमला किया गया।
4. "सबसे अधिक ध्रुवीकरण वाला राज्य":
सुनवाई के दौरान जब वकीलों ने इसे सामान्य विरोध प्रदर्शन बताया, तो प्रधान न्यायाधीश ने तीखी टिप्पणी की:
राजनीतिक मिलीभगत: "अगर यह गैर-राजनीतिक था, तो वहां राजनीतिक नेता क्या कर रहे थे? यह न्यायिक अधिकारियों का मनोबल तोड़ने का सुनियोजित कदम है।"
कड़वी सच्चाई: "दुर्भाग्य से आपके राज्य में हर व्यक्ति राजनीतिक भाषा बोलता है। यह सबसे अधिक ध्रुवीकरण वाला राज्य है।"
5. पृष्ठभूमि (SIR प्रक्रिया):
पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड में मतदाता सूचियों से बाहर किए गए 60 लाख लोगों की आपत्तियों के निपटारे के लिए लगभग 700 न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया है। मालदा की घटना ने इन सभी अधिकारियों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर दिया है।
निष्कर्ष:
उच्चतम न्यायालय का यह कड़ा रुख संदेश देता है कि चुनाव के दौरान न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों में किसी भी प्रकार का हिंसक हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 6 अप्रैल की सुनवाई में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका और इन अधिकारियों के जवाबों पर सबकी नजर रहेगी।
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