नयी दिल्ली: अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच सेवानिवृत्त हो रहे 59 सांसदों को विदाई देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन से विदा लेना सार्वजनिक जीवन से संन्यास नहीं है।
प्रधानमंत्री के संबोधन की 5 बड़ी बातें:
संसद एक 'ओपन यूनिवर्सिटी': पीएम ने कहा कि राज्यसभा का 6 साल का कार्यकाल किसी औपचारिक शिक्षा से कम नहीं है। यह राष्ट्रीय जीवन की जटिलताओं को समझने का एक अमूल्य अवसर है, जहाँ हर सांसद को 'प्रारंभिक प्रशिक्षण' मिलता है।
अनुभव का मूल्य: उन्होंने कहा कि राजनीति में कभी 'फुल स्टॉप' नहीं लगता। सेवानिवृत्त हो रहे सदस्यों का अनुभव राष्ट्रीय जीवन का स्थायी हिस्सा बना रहेगा और भविष्य उनके योगदान का इंतजार कर रहा है।
वरिष्ठ स्तंभों की सराहना: पीएम ने तीन दिग्गज नेताओं की विशेष प्रशंसा की:
एच डी देवेगौड़ा (पूर्व PM)
मल्लिकार्जुन खरगे (नेता प्रतिपक्ष)
शरद पवार (NCP प्रमुख) उन्होंने इन नेताओं को 'अनुकरणीय' बताया और नए सांसदों को उनसे निष्ठा और नियमितता सीखने की सलाह दी।
'सेकेंड ओपिनियन' का सिद्धांत: दो सदनों वाली व्यवस्था (लोकसभा और राज्यसभा) की तुलना उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र के 'सेकेंड ओपिनियन' से की। उन्होंने कहा कि एक सदन का निर्णय जब दूसरे सदन में जाता है, तो चर्चा और निर्णय लेने की प्रक्रिया को नई दिशा और मजबूती मिलती है।
हल्के-फुल्के पल: पीएम ने केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले को "सदाबहार" बताया और कहा कि उनके रहने से सदन में कभी खालीपन महसूस नहीं होता। साथ ही उन्होंने उपसभापति हरिवंश की विनम्रता और उनके द्वारा युवाओं के बीच किए गए कार्यों की भी सराहना की।
सभापति सी पी राधाकृष्णन का वक्तव्य:
निरंतरता: सभापति ने कहा कि हर दो साल में एक-तिहाई सदस्यों का रिटायर होना सदन की निरंतरता सुनिश्चित करता है।
विरासत: उन्होंने विदाई ले रहे सदस्यों से कहा कि उनके द्वारा किए गए अच्छे कार्य और सार्वजनिक सेवा इस संस्थान की स्थायी विरासत रहेंगे।
आंकड़े: अप्रैल से जुलाई के बीच 20 राज्यों के 59 सदस्य सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिनमें 9 महिला सांसद भी शामिल हैं।
प्रमुख हस्तियां जो सेवानिवृत्त हो रही हैं:
मल्लिकार्जुन खरगे: जिन्हें सभापति ने लोकतांत्रिक कार्य में "महत्वपूर्ण आवाज" कहा।
एच डी देवेगौड़ा: जिनकी उपस्थिति ने सदन की गरिमा बढ़ाई।
हरिवंश: जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों (BRICS, IPU) पर भारत का गौरव बढ़ाया।
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