यह लेख जल की महत्ता और वैश्विक जल संकट की भयावहता का सजीव चित्रण करता है। पृथ्वी पर 70% जल होने के बावजूद केवल 1% से भी कम पानी मानव उपयोग के योग्य है। लेखिका ने संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के जरिए बताया है कि कैसे 2.2 अरब लोग आज भी स्वच्छ पेयजल से वंचित हैं। भारत के संदर्भ में, जहाँ विश्व की 18% आबादी है लेकिन मीठे पानी का स्रोत केवल 4% है, यह संकट और भी गहरा है।
लेख के प्रमुख स्तंभ:
सीमित संसाधन: समुद्र का 97% खारा पानी और ग्लेशियरों में जमा मीठा पानी हमें सचेत करता है कि हमारे पास उपलब्ध जल अत्यंत सीमित है।
भारत की चुनौतियाँ: तेजी से गिरता भूजल स्तर और शहरीकरण ने जल प्रबंधन को एक अनिवार्य आवश्यकता बना दिया है।
सरकारी पहल: 'जल जीवन मिशन', 'अटल भूजल योजना' और 'कैच द रेन' जैसे अभियानों की भूमिका की सराहना की गई है।
व्यक्तिगत जिम्मेदारी: जल संरक्षण को केवल सरकारी नीति नहीं, बल्कि एक 'जीवनशैली' बनाने पर जोर दिया गया है।
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