नयी दिल्ली (2 अप्रैल 2026): गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए इसे प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक "ऐतिहासिक कदम" बताया।
1. विधेयक के मुख्य उद्देश्य (Key Objectives):
प्रशासनिक स्पष्टता: सीएपीएफ (CRPF, BSF, ITBP, CISF, SSB) के अधिकारियों की सेवा शर्तों में व्याप्त तकनीकी और प्रशासनिक अस्पष्टता को दूर करना।
कैडर प्रबंधन: बलों के भीतर कैडर प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना ताकि कार्यकुशलता बढ़ सके।
मनोबल में वृद्धि: जवानों और अधिकारियों के मनोबल को सुदृढ़ करने के लिए पदोन्नति और नियुक्तियों की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना।
2. विपक्ष के आरोपों पर मंत्री का पलटवार:
नित्यानंद राय ने विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों को "भ्रम फैलाने की कोशिश" करार दिया:
राजनीतिक रोटियां: उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस संवेदनशील मुद्दे पर केवल राजनीति कर रहा है और या तो विधेयक को समझ नहीं पाया है या नासमझ बनने का दिखावा कर रहा है।
भ्रम का निवारण: मंत्री ने जोर देकर कहा कि यह विधेयक किसी भी वर्ग (श्रेणी) के अहित में नहीं है, बल्कि यह सीएपीएफ को और अधिक सशक्त (Empowered) बनाएगा।
3. पदोन्नति (Promotion) और देरी पर स्पष्टीकरण:
विपक्षी सदस्यों ने जवानों की समय पर पदोन्नति न होने का मुद्दा उठाया था, जिस पर मंत्री ने स्पष्ट किया:
नियमित समितियां: पदोन्नति के लिए नियमित अंतराल पर समितियों का गठन किया जाता है।
विलंब के कारण: पदोन्नति में देरी केवल तभी होती है जब मामले अदालतों में लंबित हों (वरिष्ठता विवाद) या संबंधित कर्मी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही हो।
4. विधायी यात्रा का सारांश:
| चरण | स्थिति |
| राज्यसभा | बुधवार (1 अप्रैल 2026) को पारित। |
| लोकसभा | बृहस्पतिवार (2 अप्रैल 2026) को ध्वनि मत से पारित। |
| अगला कदम | राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून का रूप लेगा। |
निष्कर्ष:
इस विधेयक के पारित होने से अब केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के भीतर वर्षों से चली आ रही कैडर संबंधी विसंगतियों के दूर होने की उम्मीद है। गृह मंत्रालय का मानना है कि इससे न केवल सुरक्षा व्यवस्था और अधिक संगठित (Organized) होगी, बल्कि सीमा सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा में तैनात लाखों जवानों के करियर ग्राफ में भी पारदर्शिता आएगी।
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