छत्तीसगढ़ की जेलों की ऊँची दीवारें और लोहे की सलाखें इस बार भक्ति और आत्मशुद्धि के मार्ग में बाधा नहीं बन सकीं। चैत्र नवरात्र 2026 के पावन अवसर पर प्रदेश की विभिन्न जेलों में 2,397 बंदी (2,125 पुरुष और 272 महिला) पूर्ण श्रद्धा के साथ उपवास रख रहे हैं। जेल प्रशासन के सहयोग से जेल परिसर अब केवल दंडात्मक संस्थान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक सुधार केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।

सरगुजा संभाग में आस्था का सैलाब: विशेष रूप से सरगुजा संभाग की जेलों में 361 बंदी (336 पुरुष और 25 महिला) व्रत का पालन कर रहे हैं। केंद्रीय जेल अंबिकापुर में जेल अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत की देखरेख में विधिवत कलश स्थापना की गई है। यहाँ सुबह-शाम होने वाले भजन-कीर्तन और माता की आरती से जेल का वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर है। जशपुर, सूरजपुर, मनेंद्रगढ़ और रामानुजगंज की जिला जेलों में भी ऐसी ही भक्तिमय तस्वीरें सामने आ रही हैं।

जेल प्रशासन का मानवीय चेहरा: महानिदेशक (जेल) हिमांशु गुप्ता के निर्देशानुसार, व्रत रखने वाले बंदियों के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं:

  • आहार व्यवस्था: उपवास करने वाले बंदियों को फल, दूध, साबूदाना और अन्य फलाहारी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

  • धार्मिक स्वतंत्रता: सभी धर्मों के प्रति सम्मान दिखाते हुए, हाल ही में रमजान के दौरान भी करीब 130 बंदियों के लिए रोजा-इफ्तार और सेहरी की विशेष व्यवस्था की गई थी।

सुधार की ओर बढ़ते कदम: जेल अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के आध्यात्मिक आयोजनों से बंदियों के मानसिक तनाव में कमी आती है और उनके भीतर पछतावे के साथ-साथ एक बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा जागृत होती है। हालांकि, हाल ही में चेक बाउंस के एक दोषी को अस्पताल में 'वीआईपी सुविधा' मिलने जैसे विवादों के बीच, जेलों में यह सामूहिक साधना प्रशासन की एक सकारात्मक छवि प्रस्तुत कर रही है।

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