नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने IGNCA के न्यासियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक में भारत की 5,000 साल पुरानी संस्कृति को जन-जन तक पहुँचाने का रोडमैप साझा किया। इस दौरान पीएम ने स्पष्ट किया कि संस्कृति अब केवल 'अभिजात वर्ग' (Elite) तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका लोकतंत्रीकरण (Democratisation) जरूरी है।
बैठक के प्रमुख आकर्षण और निर्णय:
'युगे युगीन भारत' संग्रहालय: प्रधानमंत्री ने दिल्ली में बनने वाले दुनिया के सबसे बड़े संग्रहालय 'युगे युगीन भारत' की प्रगति पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक, जो कभी सत्ता के केंद्र थे, अब सांस्कृतिक शक्ति के केंद्र बनेंगे। यह संग्रहालय भारत की प्राचीन से लेकर आधुनिक सभ्यता की कहानी कहेगा।
डिजिटल और जमीनी पहुंच: चर्चा का एक बड़ा हिस्सा 'ज्ञान भारतम' मिशन (Gyan Bharatam Mission) पर केंद्रित रहा। इसके तहत भारत की लाखों दुर्लभ पांडुलिपियों (Manuscripts) का डिजिटलीकरण किया जा रहा है ताकि युवा पीढ़ी और शोधकर्ता दुनिया के किसी भी कोने से इन्हें पढ़ सकें।
कलाकारों और विद्वानों को समर्थन: पीएम ने कलाकारों और सांस्कृतिक विद्वानों को संस्थागत सहायता देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर की पहलों (Grassroots Initiatives) के माध्यम से स्थानीय लोक कलाओं को वैश्विक मंच मिलना चाहिए।
'स्व' की भावना: प्रधानमंत्री ने आईजीएनसीए की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी संस्थाएं लोगों में 'इतिहास बोध' जगाने और भारत को 'स्व' (Swa - Self) की भावना से समझने में मदद करती हैं।
39वें स्थापना दिवस की विशेष झलकियाँ:
'कलादृष्टि' प्रदर्शनी: 2016 से 2026 तक आईजीएनसीए की 10 वर्षों की उपलब्धियों को दर्शाने वाली एक भव्य फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया।
पुस्तक विमोचन: कला और सौंदर्यशास्त्र पर आधारित 'कलातत्वकोश' (खंड VIII) का विमोचन किया गया, जो भारतीय कला शब्दावली का एक अनमोल खजाना है।
IGNCA के प्रमुख न्यासी जो बैठक में शामिल थे:
| नाम | पद/भूमिका |
| राम बहादुर राय | अध्यक्ष (वरिष्ठ पत्रकार) |
| डॉ. सच्चिदानंद जोशी | सदस्य सचिव (कार्यकारी प्रमुख) |
| डॉ. सोनल मानसिंह | प्रसिद्ध नृत्यांगना और सदस्य |
| प्रसून जोशी | गीतकार एवं कवि और सदस्य |
| डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम | भरतनाट्यम प्रतिपादक और सदस्य |
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