नई दिल्ली: शीर्ष अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस पुराने आदेश को पलट दिया है जिसमें AFGIS को एक निजी संस्था माना गया था। अब AFGIS को संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत 'राज्य' की श्रेणी में रखा गया है, जिसका अर्थ है कि इसके कर्मचारी अपने मौलिक अधिकारों के हनन के मामले में सीधे रिट याचिका दायर कर सकते हैं।

अदालत ने AFGIS को 'राज्य' मानने के लिए 5 मुख्य तर्क दिए:

  1. पूर्ण प्रशासनिक नियंत्रण: सोसाइटी के न्यासी बोर्ड (Board of Trustees) और प्रबंध समिति के सभी सदस्य भारतीय वायुसेना के सेवारत अधिकारी हैं। निकाय का पूरा प्रशासन सरकारी कर्मचारियों के हाथों में है।

  2. सार्वजनिक कर्तव्य (Public Duty): सशस्त्र बलों के कर्मियों और उनके परिवारों की सुरक्षा एवं कल्याण सुनिश्चित करना एक प्रमुख सरकारी कार्य है, जो सीधे राष्ट्र की संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़ा है।

  3. सरकारी संसाधनों का उपयोग: जिस भूमि पर AFGIS का कार्यालय स्थित है, वह रक्षा मंत्रालय द्वारा प्रदान की गई है। इसके अलावा, संस्था को कई प्रकार के करों (Taxes) से छूट प्राप्त है।

  4. वित्तीय निगरानी: संस्था के प्रधान निदेशक को हर महीने अपनी वित्तीय स्थिति (Cash Flow) की जानकारी सहायक वायुसेना प्रमुख को देनी होती है, जो सीधा सरकारी पर्यवेक्षण दर्शाता है।

  5. संस्था का दोहरा रवैया: अदालत ने नोट किया कि AFGIS ने पहले 'सेवा कर' से छूट पाने के लिए खुद को 'सरकारी' बताया था। न्यायमूर्ति करोल ने तंज कसते हुए कहा कि कोई संगठन अपनी सुविधा के अनुसार एक उद्देश्य के लिए सरकारी और दूसरे के लिए निजी नहीं हो सकता।

इस फैसले का कर्मचारियों पर प्रभाव:

  • वेतन समानता और छठा वेतन आयोग: AFGIS के कर्मचारी अब छठे वेतन आयोग (6th Pay Commission) की सिफारिशों के अनुसार वेतन और अन्य लाभों की मांग कर सकेंगे।

  • रिट याचिका की सुनवाई: दिल्ली उच्च न्यायालय में 2017 से लंबित कर्मचारियों की याचिका अब 'सुनवाई योग्य' (Maintainable) मानी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय से इस मामले पर शीघ्र निर्णय लेने का अनुरोध किया है।


निष्कर्ष:

यह फैसला उन सभी अर्ध-सरकारी या निजी दिखने वाली सोसायटियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो रक्षा मंत्रालय या अन्य मंत्रालयों के तहत काम करती हैं। 'सार्वजनिक कर्तव्य' निभाने वाली संस्थाएं अब 'राज्य' की परिभाषा के दायरे में आएंगी, जिससे उनके कर्मचारियों को बेहतर कानूनी सुरक्षा और संवैधानिक अधिकार प्राप्त होंगे।

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