नयी दिल्ली/बेंगलुरु (4 अप्रैल 2026): भारतीय बायो-टेक स्टार्टअप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके चिकित्सा विज्ञान में एक बड़ी बाधा पार कर ली है। अल्जाइमर (भूलने की बीमारी) के इलाज के लिए विकसित की गई एक नई ड्रग ने तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल में 90% सफलता दर्ज की है।
मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:
एआई का कमाल: एआई ने लाखों रासायनिक यौगिकों (Compounds) का विश्लेषण मात्र 6 महीनों में कर लिया, जिसमें पारंपरिक रूप से 10 साल लगते। इससे दवा बनाने की लागत 70% कम हो गई है।
सस्ती दवा: स्टार्टअप का दावा है कि यह दवा अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स की तुलना में 80% सस्ती होगी, जिससे मध्यम वर्ग के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
मस्तिष्क की कोशिकाओं की सुरक्षा: यह दवा मस्तिष्क के उन जहरीले प्रोटीन्स को नष्ट करती है जो याददाश्त खोने का कारण बनते हैं। वैज्ञानिकों ने इसे 'न्यूरो-जेनरेशन' की दिशा में बड़ी जीत बताया है।
वैश्विक मांग: अमेरिका और यूरोप की कई बड़ी फार्मा कंपनियों ने इस भारतीय तकनीक के लिए पार्टनरशिप की इच्छा जताई है।
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