नयी दिल्ली (4 अप्रैल 2026): नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइंस के लिए जारी उस आदेश को फिलहाल टाल दिया है, जिसमें उन्हें 60% सीटें बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के आवंटित करने का निर्देश दिया गया था। एयरलाइंस द्वारा व्यावसायिक और परिचालन घाटे की दलील दिए जाने के बाद यह निर्णय लिया गया है।
मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:
एयरलाइंस का विरोध: प्रमुख घरेलू विमान कंपनियों ने सरकार को बताया कि इस आदेश से उनके राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिससे अंततः बेस फेयर (Base Fare) बढ़ाना पड़ेगा।
यात्रियों पर असर: इस आदेश पर रोक लगने से अब यात्रियों को अपनी पसंद की सीट चुनने के लिए पहले की तरह 'वेब चेक-इन' के दौरान अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है।
नीति की समीक्षा: मंत्रालय ने अब एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है जो हवाई किराए और परिचालन लागत के बीच संतुलन बनाने के लिए नई नीति तैयार करेगी।
गर्मियों की छुट्टियां: आगामी वेकेशन सीजन को देखते हुए हवाई टिकटों की मांग बढ़ने वाली है, ऐसे में इस फैसले से यात्रियों की जेब पर बोझ बढ़ सकता है।
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