छत्तीसगढ़ में 'धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026' की तैयारी: 17 जिलों में तनाव के बीच आएगा कड़ा कानून

छत्तीसगढ़ में 'धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026' की तैयारी: 17 जिलों में तनाव के बीच आएगा कड़ा कानून

12, 2, 2026

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रायपुर: छत्तीसगढ़ में मतांतरण (Religious Conversion) का मुद्दा अब केवल सामाजिक विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन चुका है। राज्य की विष्णु देव साय सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर लगाम लगाने के लिए आगामी बजट सत्र में ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ पेश करने की पूरी तैयारी कर चुकी है।

आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता: बिलासपुर बना हॉटस्पॉट

प्रदेश के गृह विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्य के कुल 33 जिलों में से 17 जिलों में मतांतरण को लेकर स्थितियां तनावपूर्ण बनी हुई हैं।

  • दर्ज मामले: पिछले एक साल के भीतर पूरे राज्य में मतांतरण से जुड़े 96 आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।

  • बिलासपुर की स्थिति: सबसे चौंकाने वाले आंकड़े बिलासपुर जिले से आए हैं, जहाँ सर्वाधिक 32 मामले दर्ज हुए हैं। इसके बाद बस्तर और सरगुजा संभाग के जिलों में भी विवाद की स्थिति बनी हुई है।

विधेयक के मुख्य प्रावधान: प्रशासन की कड़ी निगरानी

सरकार द्वारा मंजूर किए गए नए विधेयक के मसौदे में कई कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिनका उद्देश्य "धोखे या प्रलोभन" से होने वाले मतांतरण को रोकना है:

  • 60 दिन की पूर्व सूचना: अब यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे कम से कम 60 दिन पहले संबंधित जिला मजिस्ट्रेट (DM) को लिखित सूचना देनी होगी।

  • सत्यापन प्रक्रिया: सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन यह सुनिश्चित करेंगे कि धर्म परिवर्तन बिना किसी दबाव या लालच के हो रहा है।

  • सजा का प्रावधान: अवैध रूप से मतांतरण कराने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं पर भारी जुर्माने के साथ लंबी जेल की सजा का प्रस्ताव है।

बजट सत्र में होगा पेश

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की कैबिनेट ने इस मसौदे को पहले ही हरी झंडी दे दी है। माना जा रहा है कि विधानसभा के बजट सत्र के दौरान इसे सदन के पटल पर रखा जाएगा। सरकार का मानना है कि इस कानून से आदिवासी अंचलों और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ रहे सामाजिक टकराव को रोकने में मदद मिलेगी।

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