बिना मान्यता वाले स्कूलों के 'एडमिशन' विज्ञापन पर हाई कोर्ट सख्त, शिक्षा सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा पेश करने का आदेश

बिना मान्यता वाले स्कूलों के 'एडमिशन' विज्ञापन पर हाई कोर्ट सख्त, शिक्षा सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा पेश करने का आदेश

12, 2, 2026

0

image

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के निजी स्कूलों में बिना मान्यता के प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने और उनके विज्ञापनों को लेकर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इसे अदालत के आदेशों की अवमानना करार देते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा (Personal Affidavit) पेश करने का निर्देश दिया है।

मामले की जड़: बिना मान्यता के 'प्रवेश' का खेल

यह मामला जनहित याचिका में इंटरविनर विकास तिवारी द्वारा उठाए गए आपत्ति के बाद सामने आया। अदालत को बताया गया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए राजधानी रायपुर समेत कई जगहों पर निजी स्कूलों ने अखबारों और पत्रिकाओं में बड़े-बड़े विज्ञापन देकर प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी है। हैरानी की बात यह है कि इनमें से कई स्कूलों के पास आवश्यक सरकारी मान्यता (Recognition) तक नहीं है।

अधिकारियों की सुस्ती पर कोर्ट की फटकार

सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि लोक शिक्षण संचालनालय ने 5 फरवरी 2026 को ही रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को इस संबंध में जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

  • एक हफ्ते की डेडलाइन: अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देनी थी।

  • शून्य कार्रवाई: इंटरविनर ने कोर्ट को बताया कि निर्देश के हफ्तों बाद भी जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे अधिकारियों की लापरवाही साफ झलकती है।

अदालत ने इस पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए।

इन स्कूलों पर गिरी गाज, कोर्ट ने थमाया नोटिस

प्रवेश विज्ञापनों में जिन स्कूलों का नाम प्रमुखता से आया है, उन्हें हाई कोर्ट ने पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया है। इनमें शामिल हैं:

  1. कृष्णा पब्लिक स्कूल, तुलसी (रायपुर)

  2. तुलसी कृष्णा किड्स एकेडमी, मोवा

  3. कृष्णा किड्स एकेडमी की चार शाखाएं: (शंकर नगर, न्यू राजेंद्र नगर, सुंदर नगर और शैलेंद्र नगर)।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि "बिना मान्यता वाले स्कूलों द्वारा छात्रों को आकर्षित करने के लिए विज्ञापन देना अदालत के वैध आदेशों का खुला उल्लंघन है।"

अगली सुनवाई 24 मार्च को

हाई कोर्ट ने मामले की अगली तारीख 24 मार्च 2026 तय की है। उस दिन स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को यह बताना होगा कि अब तक अवैध रूप से संचालित इन स्कूलों पर क्या एक्शन लिया गया है और मान्यता के नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ विभाग क्या कदम उठा रहा है।

Powered by Froala Editor