छत्तीसगढ़ विधानसभा: बीजापुर पोटा केबिन मामले पर सदन में भारी हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट; मंत्री के 'दिवाली' वाले जवाब से भड़के कांग्रेसी

छत्तीसगढ़ विधानसभा: बीजापुर पोटा केबिन मामले पर सदन में भारी हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट; मंत्री के 'दिवाली' वाले जवाब से भड़के कांग्रेसी

12, 2, 2026

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छत्तीसगढ़ विधानसभा: बीजापुर पोटा केबिन मामले पर सदन में भारी हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट; मंत्री के 'दिवाली' वाले जवाब से भड़के कांग्रेसी

रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र का 11वां दिन बीजापुर के गंगालूर पोटा केबिन में तीन छात्राओं के गर्भवती होने के मुद्दे पर काफी हंगामेदार रहा। विपक्ष ने इस घटना को छात्राओं की सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही का चरम बताते हुए सरकार को जमकर घेरा। शिक्षा मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी विधायकों ने सदन में नारेबाजी की और अंततः विरोध स्वरूप वॉकआउट कर दिया।

शिक्षा मंत्री का जवाब: "दिवाली के बाद से घर पर थीं छात्राएं"

सदन में इस संवेदनशील मुद्दे पर उठते सवालों का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि शुरुआती जांच के अनुसार तीनों छात्राएं पिछले साल दिवाली की छुट्टियों में अपने घर गई थीं। मंत्री ने दावा किया कि उसके बाद से वे छात्राएं घर से ही स्कूल आना-जाना कर रही थीं और छात्रावास में नहीं रह रही थीं।

विपक्ष की आपत्ति: विपक्षी सदस्यों ने मंत्री के इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना था कि यदि छात्राएं छात्रावास की जिम्मेदारी में थीं, तो प्रबंधन उनकी गतिविधियों और स्वास्थ्य से बेखबर कैसे रह सकता है? विपक्ष ने इसे जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने वाला बयान करार दिया।

घटना की गंभीरता: दो छात्राएं नाबालिग

बीजापुर के गंगालूर स्थित पोटा केबिन से जुड़ी यह खबर बेहद विचलित करने वाली है:

  • गर्भावस्था की पुष्टि: तीनों छात्राएं करीब 5 महीने की गर्भवती पाई गई हैं।

  • नाबालिग छात्राएं: सबसे चिंताजनक बात यह है कि गर्भवती पाई गई छात्राओं में से दो नाबालिग हैं।

  • स्वास्थ्य विभाग के कार्ड: स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन छात्राओं के लिए 'गर्भावस्था कार्ड' भी जारी कर दिए गए थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जमीनी स्तर पर अधिकारियों को इसकी जानकारी थी, लेकिन इसे दबाए रखा गया।

अधीक्षिका की सफाई पर उठते सवाल

जहाँ एक ओर स्वास्थ्य कार्ड बन चुके थे, वहीं छात्रावास की अधीक्षिका ने बयान दिया है कि उन्हें इस पूरे मामले की कोई जानकारी नहीं थी। उनके इस बयान ने आग में घी डालने का काम किया है। विपक्ष का सवाल है कि जिस छात्रावास में नियमित स्वास्थ्य जांच (Monthly Check-up) का नियम है, वहां 5 महीने तक इतना बड़ा मामला प्रबंधन की नजरों से कैसे ओझल रहा?

विपक्ष ने बनाया बड़ा मुद्दा

अफीम की अवैध खेती के बाद अब पोटा केबिन कांड ने विष्णुदेव साय सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। कांग्रेस ने इसे सरकार की 'निगरानी विफलता' बताते हुए सीधे मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग की जवाबदेही तय करने की मांग की है। वॉकआउट के दौरान विपक्षी सदस्यों ने सदन के बाहर जमकर नारेबाजी की और दोषियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की।

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