छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026: 'सामाजिक खतरे' पर साय सरकार का प्रहार; राज्यपाल ने लौटाया पुराना बिल, अब नए कानून का रास्ता साफ
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छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026: 'सामाजिक खतरे' पर साय सरकार का प्रहार; राज्यपाल ने लौटाया पुराना बिल, अब नए कानून का रास्ता साफ

12, 2, 2026

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रायपुर: छत्तीसगढ़ में अवैध धर्मांतरण को रोकने की दिशा में विष्णु देव साय सरकार ने एक निर्णायक कदम उठाया है। 20 साल पुराने (2006) लंबित विधेयक को राज्यपाल द्वारा वापस लौटाए जाने के बाद अब 'छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026' के लागू होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। हाल ही में साय मंत्रिमंडल ने इस नए और बेहद सख्त कानून के प्रारूप को मंजूरी दी है, जो प्रदेश में प्रलोभन और दबाव के जरिए होने वाले मतांतरण पर नकेल कसेगा।

नए कानून की 5 सबसे बड़ी विशेषताएं

यह कानून पुराने 1968 के अधिनियम और 2006 के संशोधनों से कहीं अधिक आधुनिक और कठोर है:

  1. कठोर सजा का प्रावधान: सामूहिक धर्मांतरण (Mass Conversion) के मामलों में 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। नाबालिगों, महिलाओं और SC/ST/OBC वर्ग के व्यक्तियों के अवैध धर्मांतरण पर 10 से 20 साल की जेल और न्यूनतम 10 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।

  2. डिजिटल प्रलोभन पर नजर: पहली बार डिजिटल माध्यमों (सोशल मीडिया, ऑनलाइन विज्ञापन) के जरिए दिए जाने वाले प्रलोभन या झांसे को भी अवैध धर्मांतरण की श्रेणी में शामिल किया गया है।

  3. 60 दिन पहले सूचना अनिवार्य: यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट (DM) को लिखित सूचना देनी होगी। इसके बिना किया गया धर्मांतरण अवैध माना जाएगा।

  4. चंगाई सभाओं पर लगाम: गृह मंत्री विजय शर्मा के अनुसार, नए कानून में उन 'चंगाई सभाओं' (Faith Healing) को नियंत्रित करने के विशेष प्रावधान हैं, जिनका उपयोग लोगों को भ्रमित कर धर्मांतरण के लिए किया जाता है।

  5. गैर-जमानती अपराध: इस कानून के तहत दर्ज मामले संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती (Non-Bailable) होंगे, जिससे दोषियों पर त्वरित और सख्त कार्रवाई संभव होगी।

क्यों पड़ी नए कानून की जरूरत?

पिछले कुछ वर्षों में बस्तर से लेकर सरगुजा तक, धर्मांतरण को लेकर सामाजिक तनाव की घटनाएं बढ़ी हैं। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने भी कई मामलों की सुनवाई के दौरान धर्मांतरण को ‘सामाजिक खतरा’ बताया था। राजनांदगांव, जशपुर, नारायणपुर और जांजगीर-चांपा जैसे जिलों में लगातार बढ़ते विवादों ने सरकार को एक व्यापक कानून लाने के लिए प्रेरित किया।

पुराना (2006) विधेयक क्यों हुआ वापस?

डॉ. रमन सिंह की तत्कालीन भाजपा सरकार ने 2006 में एक संशोधन विधेयक पारित किया था, जो राज्यपाल के पास लंबित था। अब साय सरकार ने इसे वापस मंगाकर उसकी जगह 2026 का नया और अधिक अपडेटेड विधेयक लाने का निर्णय लिया है। यह नया बिल वर्तमान समय की चुनौतियों (डिजिटल युग और संगठित रैकेट) को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

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