ऑपरेशन साइबर शील्ड: रायपुर पुलिस ने गुड़गांव से दबोचा 'डिजिटल अरेस्ट' का मास्टरमाइंड, 1.25 करोड़ की ठगी के शिकार पीड़ित को मिले 58 लाख वापस

ऑपरेशन साइबर शील्ड: रायपुर पुलिस ने गुड़गांव से दबोचा 'डिजिटल अरेस्ट' का मास्टरमाइंड, 1.25 करोड़ की ठगी के शिकार पीड़ित को मिले 58 लाख वापस

12, 2, 2026

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रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की रेंज साइबर थाना पुलिस ने 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर देशभर में जाल बिछाने वाले एक शातिर ठग को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत की गई इस कार्रवाई में पुलिस ने हरियाणा के गुड़गांव से मुख्य आरोपी सोमनाथ महतो (27) को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने एक पीड़ित से करीब 1.25 करोड़ रुपये की ठगी की थी।

मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर दी थी धमकी

पुलिस के अनुसार, रायपुर निवासी प्रार्थी सपन कुमार को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया था। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का वरिष्ठ अधिकारी बताया। ठगों ने पीड़ित को डराया कि उनके नाम पर अवैध पार्सल या मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा मामला दर्ज हुआ है।

  • डिजिटल अरेस्ट का जाल: पीड़ित को वीडियो कॉल के जरिए घंटों तक 'डिजिटल अरेस्ट' (कैमरे के सामने रहने का दबाव) रखा गया और गिरफ्तारी का डर दिखाकर उनसे 1.25 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए।

गुड़गांव से गिरफ्तारी और तकनीकी जांच

रेंज पुलिस महानिरीक्षक (IG) अमरेश मिश्रा के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने मामले की तकनीकी जांच शुरू की।

  • लोकेशन ट्रैकिंग: कॉल डेटा और बैंक ट्रांजैक्शन के आधार पर पुलिस की टीम हरियाणा पहुँची। आरोपी सोमनाथ महतो मूलतः आर मंगलम यूनिवर्सिटी, सोहना (गुड़गांव) का निवासी है, जहाँ से उसे घेराबंदी कर पकड़ा गया।

  • खातों पर शिकंजा: पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगी की रकम जिन बैंक खातों में भेजी गई थी, उन्हें चिन्हित कर तत्काल होल्ड कराया।

पीड़ित को वापस मिले 58 लाख रुपये

रायपुर रेंज पुलिस ने न केवल आरोपी को पकड़ा, बल्कि पीड़ित की डूबी हुई रकम वापस दिलाने में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

  • रिकवरी: होल्ड कराई गई राशि में से 58 लाख रुपये की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद न्यायालय के माध्यम से पीड़ित सपन कुमार को वापस करा दिए गए हैं। शेष राशि की रिकवरी के लिए भी प्रयास जारी हैं।

सावधानी ही बचाव: IG अमरेश मिश्रा की अपील

आईजी अमरेश मिश्रा ने नागरिकों से अपील की है कि कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस अधिकारी फोन पर 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कार्रवाई नहीं करता है। यदि कोई आपको वीडियो कॉल पर डराए या पैसे की मांग करे, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या नजदीकी साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराएं।

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