बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार की नियुक्ति अवैध करार, राज्य सरकार के आदेश को किया रद्द

बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार की नियुक्ति अवैध करार, राज्य सरकार के आदेश को किया रद्द

12, 2, 2026

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बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार पद पर की गई नियुक्ति को कानून के विरुद्ध बताते हुए रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के पास सीधे रजिस्ट्रार नियुक्त करने की शक्ति नहीं है, बल्कि यह अधिकार वैधानिक रूप से 'काउंसिल' के पास सुरक्षित है।

विवाद की जड़: स्टोर कीपर को बनाया गया था रजिस्ट्रार

यह पूरा कानूनी विवाद डॉ. राकेश गुप्ता द्वारा दायर एक याचिका के बाद शुरू हुआ। याचिका में राज्य सरकार के 14 मार्च 2024 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल हॉस्पिटल में कार्यरत स्टोर कीपर अश्वनी गुरडेकर को रजिस्ट्रार पद का प्रभार सौंपा गया था।

फार्मेसी एक्ट, 1948 का उल्लंघन

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकीलों ने कानून की बारीकियों को सामने रखा:

  • धारा 26 का हवाला: फार्मेसी एक्ट, 1948 की धारा 26 के अनुसार, रजिस्ट्रार की नियुक्ति करने का प्राथमिक अधिकार राज्य फार्मेसी काउंसिल के पास है। राज्य सरकार की भूमिका केवल इस नियुक्ति पर अपनी पूर्व स्वीकृति (Prior Approval) देने तक सीमित है।

  • सीधा हस्तक्षेप: इस मामले में राज्य सरकार ने काउंसिल के अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण करते हुए सीधे आदेश जारी कर दिया था, जिसे कोर्ट ने असंवैधानिक माना।

पात्रता पर भी उठे सवाल

कोर्ट ने न केवल नियुक्ति की प्रक्रिया बल्कि व्यक्ति की पात्रता पर भी टिप्पणी की। अदालत ने पाया कि:

  1. अश्वनी गुरडेकर वर्तमान में एक अस्पताल में स्टोर कीपर के पद पर कार्यरत हैं।

  2. वे रजिस्ट्रार पद के लिए निर्धारित आवश्यक शैक्षणिक और प्रशासनिक पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं।

  3. काउंसिल की ओर से ऐसा कोई रिकॉर्ड या प्रस्ताव पेश नहीं किया गया जो यह साबित करे कि उन्होंने इस नियुक्ति की सिफारिश की थी।

अदालत की सख्त टिप्पणी: "प्रक्रिया ही सर्वोपरि"

सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि "जब कानून किसी कार्य को करने का एक निश्चित तरीका तय करता है, तो उसी प्रक्रिया का अक्षरशः पालन किया जाना चाहिए।" नया निर्देश: कोर्ट ने 14 मार्च 2024 के आदेश को निरस्त करते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अब रजिस्ट्रार की नियुक्ति की नई प्रक्रिया कानून के अनुसार (काउंसिल के प्रस्ताव के माध्यम से) तुरंत शुरू की जाए।

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