आत्मानंद स्कूलों पर छिड़ा सियासी घमासान: नए सत्र से बंद होंगी प्री-नर्सरी कक्षाएं; कांग्रेस ने कहा- 'गरीब बच्चों के भविष्य से खेल रही भाजपा सरकार'

आत्मानंद स्कूलों पर छिड़ा सियासी घमासान: नए सत्र से बंद होंगी प्री-नर्सरी कक्षाएं; कांग्रेस ने कहा- 'गरीब बच्चों के भविष्य से खेल रही भाजपा सरकार'

12, 2, 2026

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रायपुर: छत्तीसगढ़ की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक 'स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय' योजना पर अब संकट के बादल मंडराने लगे हैं। विधानसभा के बजट सत्र के 8वें दिन सरकार ने सदन में घोषणा की है कि अगले शैक्षणिक सत्र से इन स्कूलों में प्री-नर्सरी (Pre-Nursery) की कक्षाएं संचालित नहीं की जाएंगी। इस फैसले के बाद विपक्ष ने सरकार पर शिक्षा के निजीकरण और गरीबों के हक छीनने का गंभीर आरोप लगाया है।

सदन में क्या हुआ? मंत्री का जवाब और विपक्ष के सवाल

प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने आत्मानंद स्कूलों के भविष्य और वहां चल रही बुनियादी शिक्षा को लेकर सवाल उठाए।

  • सरकार का फैसला: स्कूल शिक्षा मंत्री ने जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि नए सत्र से आत्मानंद स्कूलों में प्री-नर्सरी की कक्षाएं बंद कर दी जाएंगी और इनमें नए प्रवेश (Admissions) नहीं लिए जाएंगे।

  • टीचर्स की छंटनी के संकेत: मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि DMF (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन) के नियमों में बदलाव होने के कारण प्री-प्राइमरी कक्षाओं में कार्यरत शिक्षकों को हटाया जा सकता है, क्योंकि उनका वेतन इसी मद से दिया जा रहा था।

कांग्रेस का तीखा हमला: "गरीबों की शिक्षा बंद करना चाहती है भाजपा"

सरकार के इस रुख पर कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कड़ा प्रहार किया। उन्होंने सरकार के इरादों पर सवाल उठाते हुए कहा:

"भाजपा सरकार धीरे-धीरे आत्मानंद स्कूलों को बंद करने की साजिश रच रही है। सरकार जानबूझकर इन स्कूलों को मिलने वाली सुविधाओं और फंड में कटौती कर रही है। भाजपा नहीं चाहती कि गरीब का बच्चा निजी स्कूलों जैसी स्तरीय शिक्षा मुफ्त में पा सके।"

विवाद का मुख्य कारण: DMF फंड और प्री-प्राइमरी मॉडल

विवाद की असली जड़ वह फंडिंग मॉडल है जिसके तहत आत्मानंद स्कूलों का विस्तार हुआ था।

  • फंडिंग में बदलाव: मौजूदा सरकार का तर्क है कि आत्मानंद स्कूलों में अत्यधिक खर्च और प्रबंधन की कमियां हैं।

  • शिक्षा का अधिकार: विपक्ष का कहना है कि प्री-नर्सरी से ही बच्चों को अंग्रेजी माध्यम की नींव देने वाली इस योजना को बंद करना लाखों बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

क्या होगा आगे?

कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि आत्मानंद स्कूलों की गुणवत्ता से समझौता किया गया या उन्हें बंद करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए, तो वे सड़क से सदन तक उग्र आंदोलन करेंगे। फिलहाल, नए सत्र में एडमिशन की उम्मीद लगाए बैठे हजारों अभिभावकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

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