छत्तीसगढ़ में होली पर छलका जाम: 128 करोड़ की रिकॉर्ड तोड़ शराब बिक्री; एक दिन में कमाई के टूटे सभी पुराने रिकॉर्ड

छत्तीसगढ़ में होली पर छलका जाम: 128 करोड़ की रिकॉर्ड तोड़ शराब बिक्री; एक दिन में कमाई के टूटे सभी पुराने रिकॉर्ड

12, 2, 2026

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रायपुर: छत्तीसगढ़ में इस साल होली के त्योहार के दौरान शराब की बिक्री ने प्रदेश के अब तक के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। आबकारी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, होली से एक दिन पहले यानी 3 मार्च 2026 को प्रदेश भर में लगभग 128 करोड़ रुपये की शराब बिकी। यह छत्तीसगढ़ के इतिहास में किसी भी एक दिन में दर्ज की गई सबसे अधिक बिक्री है।

नए साल का रिकॉर्ड भी पीछे छूटा

इससे पहले एक दिन में सर्वाधिक बिक्री का रिकॉर्ड इसी साल 31 दिसंबर (नए साल के अवसर) पर बना था, जब प्रदेश में 124 करोड़ रुपये की शराब की खपत हुई थी। होली के खुमार ने इस आंकड़े को भी पार कर लिया।

  • होली के बाद की बिक्री: होली के अगले दिन यानी 5 मार्च को भी दुकानों पर भारी भीड़ देखी गई और करीब 50 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ।

  • सामान्य बनाम त्योहार: सामान्य दिनों में छत्तीसगढ़ में औसत दैनिक बिक्री लगभग 40 करोड़ रुपये रहती है, लेकिन इस बार होली के चलते यह तीन गुना से भी अधिक बढ़ गई।

रायपुर रहा सबसे आगे

राजधानी रायपुर में शराब की खपत सबसे अधिक दर्ज की गई। अकेले रायपुर जिले में 3 मार्च को करीब 58 करोड़ रुपये की शराब बेची गई, जो जिलेवार बिक्री में शीर्ष पर रहा।

आबकारी नीति और 'ड्राई डे' का विवाद

इस साल की आबकारी नीति को लेकर काफी राजनीतिक और सामाजिक बहस देखने को मिली:

  1. ड्राई डे में बदलाव: सरकार ने शुरुआत में अपनी नई आबकारी नीति (2026-27) के तहत होली, मुहर्रम और महात्मा गांधी निर्वाण दिवस (30 जनवरी) को 'ड्राई डे' की सूची से हटा दिया था।

  2. विरोध और संशोधन: इस फैसले का चौतरफा विरोध हुआ। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने बापू के सिद्धांतों और त्योहारों की गरिमा का हवाला देते हुए आंदोलन किया। जनभावनाओं को देखते हुए सरकार ने अपने फैसले में संशोधन किया और होली पर पुनः शुष्क दिवस (Dry Day) घोषित किया।

  3. वर्तमान ड्राई डे: अब प्रदेश में केवल चार मुख्य अवसरों—26 जनवरी, 15 अगस्त, 2 अक्टूबर और 18 दिसंबर (गुरु घासीदास जयंती)—पर ही शराब दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी।

राजस्व और अवैध बिक्री पर तर्क

सरकार का तर्क था कि त्योहारों पर ड्राई डे होने से अवैध शराब की बिक्री और ब्लैक मार्केटिंग बढ़ जाती है। दुकानों को खुला रखने से जहां सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलता है, वहीं शराब की गुणवत्ता और मूल्य पर नियंत्रण रहता है। हालांकि, भारी विरोध के बाद त्योहारों पर प्रतिबंध जारी रखने का फैसला लिया गया।

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