मिशन 2028: 'लाड़ली' के बाद अब 'अन्नदाता' पर दांव; एमपी सरकार का मास्टर प्लान

मिशन 2028: 'लाड़ली' के बाद अब 'अन्नदाता' पर दांव; एमपी सरकार का मास्टर प्लान

12, 2, 2026

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मध्यप्रदेश सरकार ने साल 2026 को पूरी तरह किसानों को समर्पित कर दिया है। सोमवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित अभिमुखीकरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कृषि क्षेत्र को मजबूत करना और किसानों की आय बढ़ाना सरकार का मिशन मोड एजेंडा है।

1. दिल्ली से मिली 'मुहर' और केंद्रीय सहयोग

सीएम मोहन यादव की हालिया दिल्ली यात्रा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात महज शिष्टाचार नहीं थी।

  • भविष्य की रणनीति: सीएम ने पीएम मोदी को 'किसान कल्याण वर्ष' की गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी।

  • बड़ी मंजूरी: केंद्रीय कृषि मंत्री ने मध्यप्रदेश के लिए भावांतर भुगतान योजना (सरसों के लिए) और सोयाबीन क्षति के लिए सैटेलाइट आधारित सटीक सर्वे को मंजूरी दी है।

  • 2028 का एजेंडा: माना जा रहा है कि दिल्ली में हुई इन मुलाकातों में अगले चुनाव के लिए किसानों को केंद्र में रखने की रणनीति पर शीर्ष नेतृत्व ने सहमति दे दी है।

2. कृषि कैबिनेट और 27,500 करोड़ का मेगा प्लान

सरकार ने केवल घोषणाएं नहीं की हैं, बल्कि बजट का भी इंतजाम किया है:

  • नवाचार: पहली बार बड़वानी के नागलवाड़ी (भीलट बाबा धाम) में कृषि कैबिनेट की बैठक कर सरकार ने संकेत दिया कि वह सीधे खेतों तक पहुँचेगी।

  • भारी निवेश: किसानों और उनसे जुड़े क्षेत्रों (पशुपालन, मत्स्य, सिंचाई) के लिए 27,500 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी दी गई है।

  • इंटीग्रेटेड फिशरीज पॉलिसी 2026: मछली पालन को आधुनिक बनाने और 20,000 रोजगार सृजित करने के लिए नई नीति लागू की गई है।

3. 'समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश': चुनावी समीकरण

बीजेपी की रणनीति में यह बदलाव काफी महत्वपूर्ण है:

  • लाड़ली बहना से आगे: 2023 के चुनाव में 'लाड़ली बहना योजना' गेम-चेंजर रही थी। अब 2028 के लिए सरकार किसानों को अपना सबसे बड़ा 'वोट बैंक' मानकर चल रही है।

  • हर विधानसभा में सम्मेलन: सरकार ने हर विधानसभा क्षेत्र में 'कृषि सम्मेलन' आयोजित करने के लिए 5-5 लाख रुपये आवंटित किए हैं।

  • बोनस और एमएसपी: ग्रीष्मकालीन उड़द पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस की घोषणा और सोयाबीन-सरसों पर भावांतर योजना के जरिए सीधे आर्थिक लाभ पहुँचाने की कोशिश है।

4. कांग्रेस का प्रहार: "सिर्फ चुनावी स्टंट"

विपक्ष (कांग्रेस) इस पूरी कवायद को 2028 के लिए 'सियासी स्टंट' बता रहा है।

  • आरोप: कांग्रेस का कहना है कि सरकार खाद की किल्लत और किसानों की आत्महत्या जैसे बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ईवेंट मैनेजमेंट कर रही है।

  • मांग: विपक्ष कर्ज माफी और एमएसपी की कानूनी गारंटी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।


निष्कर्ष: क्या अन्नदाता बदलेंगे 2028 की तस्वीर?

मुख्यमंत्री मोहन यादव का "संकल्प से समाधान" अभियान (12 जनवरी से 31 मार्च 2026) यह सुनिश्चित करने के लिए है कि योजनाओं का लाभ धरातल पर पहुँचे। यदि सरकार दूध उत्पादन में 25% की बढ़ोतरी और सिंचाई रकबे को 100 लाख हेक्टेयर तक ले जाने के अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर लेती है, तो 2028 में किसानों का 'दंगल' दिलचस्प होगा।

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