बलरामपुर कांग्रेस में 'इस्तीफा पतझड़': नई कार्यकारिणी पर उठा बवंडर; दो और मंडल अध्यक्षों ने छोड़ा पद, 'गद्दारों' को तवज्जो देने का आरोप
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बलरामपुर कांग्रेस में 'इस्तीफा पतझड़': नई कार्यकारिणी पर उठा बवंडर; दो और मंडल अध्यक्षों ने छोड़ा पद, 'गद्दारों' को तवज्जो देने का आरोप

12, 2, 2026

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बलरामपुर: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में कांग्रेस संगठन के भीतर 'अंतर्कलह' विस्फोटक स्थिति में पहुँच गई है। जिला कांग्रेस कमेटी की नई कार्यकारिणी घोषित होने के बाद शुरू हुआ इस्तीफों का सिलसिला अब थमने के बजाय और तेज हो गया है। पहले 11 पदाधिकारियों के सामूहिक इस्तीफे के बाद अब दो और प्रभावशाली मंडल अध्यक्षों ने अपने पदों से त्यागपत्र देकर प्रदेश नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।

नए इस्तीफे और गंभीर आरोप

ताजा घटनाक्रम में लालसाय मिंज और असमीता टोप्पो ने पीसीसी चीफ दीपक बैज को अपना इस्तीफा भेजते हुए जिला नेतृत्व पर तीखे प्रहार किए हैं:

  • लालसाय मिंज (अध्यक्ष, कन्दरी मंडल): मिंज ने अपने पत्र में सीधा आरोप लगाया है कि वर्तमान जिलाध्यक्ष ने कार्यकारिणी में उन चेहरों को जगह दी है, जिन्होंने पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के खिलाफ काम किया और भाजपा (BJP) की मदद की थी।

  • असमीता टोप्पो (अध्यक्ष, इदरी कला मंडल): असमीता ने भी संगठन में नियुक्तियों की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे लोगों को उपकृत किया गया है।

बढ़ता असंतोष: अब तक का घटनाक्रम

बलरामपुर जिले में कांग्रेस की स्थिति फिलहाल 'हवा में महल' जैसी नजर आ रही है:

  1. शुरुआती बगावत: नई लिस्ट जारी होते ही 11 वरिष्ठ पदाधिकारियों ने एक साथ इस्तीफा देकर अपनी नाराजगी जताई थी।

  2. कार्यकर्ताओं का गुस्सा: कार्यकर्ताओं का मानना है कि संगठन में 'सक्रियता' के बजाय 'चाटुकारिता' और 'गुटबाजी' को आधार बनाकर पद बांटे गए हैं।

  3. चुनावों पर असर: इस्तीफा देने वाले नेताओं का तर्क है कि जिन लोगों ने पार्टी को हार की कगार पर पहुँचाया, उन्हें ही कमान सौंपना आत्मघाती कदम है।

पीसीसी चीफ दीपक बैज के सामने बड़ी चुनौती

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC Chief) दीपक बैज के लिए बलरामपुर का यह संकट सिरदर्द बन गया है। एक तरफ पार्टी आगामी स्थानीय निकायों और पंचायत चुनावों की तैयारी में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ संगठनात्मक ढांचा ढहता नजर आ रहा है।

  • अगला कदम: जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते प्रदेश नेतृत्व ने दखल नहीं दिया, तो बलरामपुर में कांग्रेस का आधार और कमजोर हो सकता है। फिलहाल बागी नेता किसी भी कीमत पर 'पार्टी विरोधियों' के साथ काम करने को तैयार नहीं हैं।

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