छत्तीसगढ़ का विश्व रिकॉर्ड: मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना 'गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' में दर्ज; एक ही दिन में 6,412 जोड़े बने जीवनसाथी
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छत्तीसगढ़ का विश्व रिकॉर्ड: मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना 'गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' में दर्ज; एक ही दिन में 6,412 जोड़े बने जीवनसाथी

12, 2, 2026

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रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने 'अंत्योदय' और 'सर्वधर्म समभाव' की भावना को चरितार्थ करते हुए एक नया इतिहास रचा है। 10 फरवरी 2026 को आयोजित राज्य स्तरीय सामूहिक विवाह समारोह को दुनिया के सबसे बड़े सामूहिक विवाह आयोजनों में से एक के रूप में मान्यता मिली है।

आयोजन की मुख्य विशेषताएं (Key Highlights)

  • कुल विवाह: प्रदेश भर में कुल 6,412 जोड़ों का विवाह एक साथ संपन्न हुआ।

  • रायपुर का मुख्य समारोह: राजधानी के साइंस कॉलेज मैदान में 1,316 जोड़ों ने प्रत्यक्ष रूप से मुख्यमंत्री की उपस्थिति में फेरे लिए।

  • वर्चुअल जुड़ाव: शेष जोड़े प्रदेश के विभिन्न जिलों से डिजिटल माध्यम (Virtual Mode) से इस महा-उत्सव का हिस्सा बने।

  • विविधता में एकता: इस समारोह में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध धर्म के साथ-साथ विशेष पिछड़ी जनजाति 'बैगा समुदाय' के जोड़ों ने भी अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों से विवाह किया।

आर्थिक संबल और सामाजिक सुरक्षा

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए योजना के महत्व पर प्रकाश डाला:

  • वित्तीय सहायता: योजना के अंतर्गत प्रत्येक नवविवाहित दंपति को 35,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई, ताकि वे अपने नए जीवन की शुरुआत बिना किसी आर्थिक बोझ के कर सकें।

  • चिंता का निवारण: सीएम ने कहा कि यह योजना गरीब परिवारों के लिए बेटियों की शादी की चिंता को दूर कर उन्हें सामाजिक सुरक्षा और सम्मान प्रदान करने का एक मजबूत आधार बनी है।

विरासत और विस्तार

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने जानकारी दी कि इस योजना की नींव पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में रखी गई थी। वर्तमान सरकार ने इसे और अधिक व्यापक और पारदर्शी बनाते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का संकल्प लिया है।

सांस्कृतिक संदेश

यह आयोजन केवल एक सरकारी आंकड़ा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और आपसी सद्भाव का जीवंत उदाहरण बन गया है। एक ही मंडप के नीचे अलग-अलग धर्मों और जनजातियों का वैवाहिक बंधन में बंधना राज्य की 'सबका साथ, सबका विकास' की नीति को प्रदर्शित करता है।

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