श्रीलंका में अब '4-डे वर्किंग वीक': ईंधन बचाने के लिए बुधवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित; स्कूल-कॉलेज और अदालतें भी रहेंगी बंद

श्रीलंका में अब '4-डे वर्किंग वीक': ईंधन बचाने के लिए बुधवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित; स्कूल-कॉलेज और अदालतें भी रहेंगी बंद

12, 2, 2026

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कोलंबो: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी ईरान-इजराइल भीषण जंग की तपिश अब श्रीलंका तक पहुँच गई है। वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका और संभावित ईंधन संकट से निपटने के लिए राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायक की सरकार ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। अब श्रीलंका में सरकारी कर्मचारी सप्ताह में केवल चार दिन काम करेंगे।

ऊर्जा संरक्षण के लिए 'सुपर वेडनेसडे' प्लान

सोमवार, 16 मार्च 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में श्रीलंका सरकार ने ईंधन और बिजली की खपत कम करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

  • बुधवार को छुट्टी: अब हर बुधवार को पूरे देश में सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इसकी शुरुआत कल, 18 मार्च 2026 से होने जा रही है।

  • शैक्षणिक संस्थान: देश के सभी सरकारी स्कूल और विश्वविद्यालय बुधवार को बंद रहेंगे।

  • न्यायिक प्रणाली: अदालतों में भी बुधवार को कोई सुनवाई नहीं होगी।

  • निजी क्षेत्र से अपील: सरकार ने निजी कंपनियों से भी अनुरोध किया है कि वे बुधवार को छुट्टी दें या 'वर्क फ्रॉम होम' नीति लागू करें ताकि सड़कों पर वाहनों की आवाजाही कम हो और ईंधन की बचत की जा सके।

क्यों लिया गया यह फैसला?

आवश्यक सेवा आयुक्त प्रभात चंद्रकीर्ति ने इस आपातकालीन कदम के पीछे की गंभीरता को स्पष्ट किया है:

  1. होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट: ईरान-इजराइल युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। श्रीलंका को डर है कि तेल की खेप पहुँचने में देरी से देश में पेट्रोल-डीजल का स्टॉक खत्म हो सकता है।

  2. अग्रिम सावधानी: सरकार 2022 जैसे आर्थिक संकट की पुनरावृत्ति नहीं चाहती, इसलिए ईंधन की उपलब्धता को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए अभी से कटौती शुरू कर दी गई है।

इन सेवाओं पर नहीं लागू होगा नियम (Essential Services)

जनता को बुनियादी समस्याओं का सामना न करना पड़े, इसलिए कुछ विभागों को इस कटौती से बाहर रखा गया है। निम्नलिखित सेवाएं 5 या 6 दिन सुचारू रूप से चलती रहेंगी:

  • स्वास्थ्य विभाग (अस्पताल)

  • बंदरगाह (Ports)

  • जल आपूर्ति विभाग

  • सीमा शुल्क (Customs)

निष्कर्ष

श्रीलंका का यह फैसला दर्शाता है कि आधुनिक दुनिया में एक क्षेत्रीय युद्ध कैसे दूसरे महाद्वीप के देशों की दिनचर्या को बदल सकता है। श्रीलंका सरकार की नजरें अब वैश्विक तेल बाजार और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर टिकी हैं।

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