बिलासपुर नसबंदी कांड: 11 साल बाद आया फैसला; सर्जन डॉ. आर.के. गुप्ता को 2 साल की जेल, दवा कंपनी के आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी

बिलासपुर नसबंदी कांड: 11 साल बाद आया फैसला; सर्जन डॉ. आर.के. गुप्ता को 2 साल की जेल, दवा कंपनी के आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी

12, 2, 2026

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बिलासपुर (18 मार्च 2026): प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) शैलेश कुमार की अदालत ने नवंबर 2014 के उस भयावह नसबंदी कांड पर फैसला सुनाया है जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। अदालत ने वरिष्ठ सर्जन डॉ. आर.के. गुप्ता को लापरवाही का दोषी माना है।

1. सर्जन डॉ. आर.के. गुप्ता को सजा

अदालत ने डॉ. गुप्ता द्वारा महज 3 घंटे में 83 ऑपरेशन करने को घोर लापरवाही माना। उन पर निम्नलिखित धाराओं के तहत सजा सुनाई गई है:

  • धारा 304 (ए) (लापरवाही से मौत): 2 साल का कारावास और 25,000 रुपये का जुर्माना।

  • धारा 337: 6 माह की जेल और 500 रुपये जुर्माना।

  • धारा 379: 1 माह की सजा।

कोर्ट की टिप्पणी: इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में ऑपरेशन करना मानक प्रक्रियाओं का उल्लंघन है, जिससे महिलाओं में 'सेप्टीसीमिया' (खून में संक्रमण) फैला और उनकी जान गई।

2. दवा कंपनियों के आरोपी हुए दोषमुक्त

हादसे के बाद यह आरोप लगा था कि महिलाओं को दी गई 'सिप्रोसिन' टेबलेट में चूहामार दवा (जिंक फास्फाइड) मिली हुई थी। इस मामले में महावर फार्मा और कविता फार्मास्युटिकल्स के पांच संचालकों (रमेश महावर, सुमित महावर, राकेश खरे, राजेश और मनीष खरे) को आरोपी बनाया गया था।

  • फैसला: अदालत ने साक्ष्य के अभाव में इन सभी 5 आरोपियों को दोषमुक्त (बरी) करने का आदेश दिया है।

घटनाक्रम: नवंबर 2014 की वो काली शाम

  • शिविर का आयोजन: बिलासपुर के पेंडारी और पेंड्रा में सरकारी नसबंदी शिविर लगाए गए थे।

  • हादसा: ऑपरेशन के कुछ घंटों बाद ही महिलाओं की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें सिम्स, जिला अस्पताल और अपोलो में भर्ती कराया गया।

  • हताहत: इस त्रासदी में कुल 18 महिलाओं की मौत हुई और 100 से अधिक महिलाएं गंभीर रूप से बीमार हुईं।

  • विवाद: शुरुआती जांच में इसे कभी ऑपरेशन की गंदगी (अस्वच्छता) तो कभी नकली दवाओं का परिणाम बताया गया था।

पीड़ित परिवारों की प्रतिक्रिया

11 साल के लंबे कानूनी संघर्ष के बाद आए इस फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली है। जहाँ मुख्य सर्जन को सजा मिलने से न्याय की उम्मीद जगी है, वहीं दवा कंपनी के मालिकों के बरी होने से कुछ पीड़ित परिवारों में असंतोष है।

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