IPO मार्केट 2026: युद्ध और बाजार की सुस्ती से बड़े IPO पर संकट; Jio, Flipkart और SBI फंड्स की लिस्टिंग टलने के आसार

IPO मार्केट 2026: युद्ध और बाजार की सुस्ती से बड़े IPO पर संकट; Jio, Flipkart और SBI फंड्स की लिस्टिंग टलने के आसार

12, 2, 2026

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मुंबई (18 मार्च 2026): भारतीय शेयर बाजार में मंदी के बादल छाए हुए हैं, जिसका सीधा असर नई कंपनियों की लिस्टिंग पर पड़ रहा है। इस साल लगभग 70,000 करोड़ रुपये के मेगा आईपीओ आने वाले थे, लेकिन मौजूदा हालातों ने कंपनियों को अपनी टाइमलाइन दोबारा जांचने पर मजबूर कर दिया है।

1. प्राइमरी मार्केट में सुस्ती के आंकड़े

इस साल की पहली तिमाही (Q1 2026) पिछले साल के मुकाबले कमजोर रही है:

  • कुल आईपीओ: इस साल अब तक केवल 16,000 करोड़ रुपये के आईपीओ आए हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 19,000 करोड़ रुपये था।

  • लिस्टिंग का हाल: अब तक आए 9 मेनबोर्ड आईपीओ में से 7 की लिस्टिंग निगेटिव रही है, यानी वे अपने इश्यू प्राइस से नीचे खुले हैं। इससे खुदरा निवेशकों का भरोसा डगमगाया है।

2. आगामी 'मेगा IPO' और उनकी चुनौतियां

बाजार की नजरें इन तीन बड़ी कंपनियों पर टिकी हैं, लेकिन युद्ध की अनिश्चितता ने इन्हें संकट में डाल दिया है:

कंपनीसंभावित वैल्यूएशनफंड जुटाने का लक्ष्यस्थिति
Jio प्लेटफॉर्म्स$170 बिलियन~₹40,000 करोड़बैंकों के साथ चर्चा जारी; देरी की संभावना।
Flipkart$37 बिलियन-अल्फाबेट का निवेश शामिल; मार्केट सेंटीमेंट का इंतजार।
SBI फंड्स-$1.2 बिलियन (~₹10,000 करोड़)कतार में है, लेकिन वैल्यूएशन पर दबाव।

3. PhonePe ने खींचे हाथ; जेप्टो और अन्य भी कतार में

  • PhonePe का फैसला: बाजार की अस्थिरता को देखते हुए दिग्गज फिनटेक कंपनी PhonePe ने अपने आईपीओ को फिलहाल आगे बढ़ाने (Postpone) का निर्णय लिया है।

  • निवेशकों का दबाव: निवेशक अब कंपनियों से वैल्यूएशन कम करने की मांग कर रहे हैं ताकि लिस्टिंग के समय कुछ 'लिस्टिंग गेन' की गुंजाइश बनी रहे।

  • अन्य कंपनियां: क्विक कॉमर्स कंपनी Zepto और कई अन्य स्टार्टअप्स भी आईपीओ की तैयारी में हैं, लेकिन ग्लोबल मार्केट में हलचल कम होने तक वे लॉन्चिंग से बच रहे हैं।

4. विशेषज्ञों की राय: युद्ध और ब्याज दरें

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक मध्य-पूर्व (West Asia) में युद्ध विराम या शांति की स्थिति नहीं बनती, तब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स में बड़ा जोखिम लेने से बचेंगे। साथ ही, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें घरेलू महंगाई और ब्याज दरों पर दबाव बना रही हैं, जो आईपीओ मार्केट के लिए शुभ संकेत नहीं हैं।


निष्कर्ष: निवेशकों के लिए सलाह

मौजूदा समय में आईपीओ में निवेश करने से पहले कंपनी के फंडामेंटल्स और बाजार के सेंटीमेंट को समझना बेहद जरूरी है। निगेटिव लिस्टिंग का बढ़ता ग्राफ यह चेतावनी दे रहा है कि केवल 'हाइप' के आधार पर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।

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