संसद में 'चाय-बिस्कुट' विवाद: 204 पूर्व अधिकारियों ने राहुल गांधी से मांगी माफी; कंगना रनौत के 'टपोरी' वाले बयान पर गरमाई राजनीति

संसद में 'चाय-बिस्कुट' विवाद: 204 पूर्व अधिकारियों ने राहुल गांधी से मांगी माफी; कंगना रनौत के 'टपोरी' वाले बयान पर गरमाई राजनीति

12, 2, 2026

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नई दिल्ली (18 मार्च 2026): संसद परिसर के मकर द्वार (Makar Dwar) की सीढ़ियों पर बैठकर चाय-बिस्कुट पीने और विरोध प्रदर्शन करने के मामले ने अब एक बड़ा मोड़ ले लिया है। इसे लेकर देश के प्रबुद्ध वर्ग और सत्ता पक्ष ने राहुल गांधी के नेतृत्व वाले विपक्ष पर कड़ा प्रहार किया है।

1. 204 पूर्व अधिकारियों का ओपन लेटर: "देश से माफी मांगें राहुल"

17 मार्च को 204 पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों (जिनमें 116 पूर्व सैन्य अधिकारी, 84 पूर्व नौकरशाह और 4 राजदूत शामिल हैं) ने एक खुला पत्र जारी किया।

  • प्रमुख मांग: पत्र में राहुल गांधी से देश से माफी मांगने की मांग की गई है।

  • तर्क: अधिकारियों का कहना है कि संसद की सीढ़ियाँ 'पिकनिक स्पॉट' या 'राजनीतिक रंगमंच' नहीं हैं। स्पीकर के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद वहाँ बैठकर चाय-नाश्ता करना संसदीय गरिमा और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति 'अहंकार और विशेषाधिकार' की भावना को दर्शाता है।

  • नेतृत्व: इस पत्र का समन्वय जम्मू-कश्मीर के पूर्व DGP एस.पी. वैद ने किया है।

2. कंगना रनौत बनाम कांग्रेस: 'टपोरी' शब्द पर छिड़ा युद्ध

भाजपा सांसद कंगना रनौत ने इस मुद्दे पर राहुल गांधी के आचरण को लेकर बेहद तल्ख टिप्पणी की है:

  • कंगना का बयान: उन्होंने राहुल गांधी के व्यवहार को 'टपोरी' (Tapori) जैसा बताते हुए कहा कि उनके 'तू-तड़ाक' वाले अंदाज और हुटिंग से महिला सांसद असहज (Uncomfortable) महसूस करती हैं। उन्होंने राहुल की तुलना उनकी बहन प्रियंका गांधी से करते हुए कहा कि प्रियंका का आचरण बेहतर है।

  • कांग्रेस का पलटवार: कांग्रेस विधायक असलम शेख ने कंगना को उनके 'अतीत' की याद दिलाते हुए कहा कि उन्हें दूसरों पर टिप्पणी करने से पहले खुद के बारे में गूगल पर सर्च करना चाहिए।

3. संसदीय नियम और विवाद की पृष्ठभूमि

  • 12 मार्च की घटना: राहुल गांधी और विपक्षी सांसद देश में LPG की कमी और बढ़ती कीमतों के खिलाफ मकर द्वार पर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें सीढ़ियों पर चाय-बिस्कुट का लुत्फ उठाते देखा गया।

  • निशिकांत दुबे का नोटिस: भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को इस संबंध में एक 'पेन ड्राइव' सबूत के तौर पर सौंपते हुए राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि "संसद कैंटीन नहीं है।"


निष्कर्ष: लोकतंत्र में विरोध की सीमा क्या हो?

यह विवाद केवल एक 'चाय-बिस्कुट' के पल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र के मंदिर (संसद) में विरोध प्रदर्शन के शिष्टाचार और मर्यादा पर सवाल खड़ा करता है। जहाँ विपक्ष इसे जनता के मुद्दों (LPG संकट) को उठाने का एक तरीका बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष और पूर्व अधिकारी इसे संसदीय परंपराओं का अपमान मान रहे हैं।

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