अयोध्या में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू: राम मंदिर के दूसरे तल पर 150 किलो के स्वर्णमंडित 'श्रीराम यंत्र' की स्थापना; वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजी रामनगरी
आज की ताजा खबर
LIVE

अयोध्या में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू: राम मंदिर के दूसरे तल पर 150 किलो के स्वर्णमंडित 'श्रीराम यंत्र' की स्थापना; वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजी रामनगरी

12, 2, 2026

16

image

अयोध्या (19 मार्च 2026): राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज अपने एक दिवसीय दौरे पर अयोध्या पहुँचीं। महर्षि वाल्मीकि एयरपोर्ट पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका आत्मीय स्वागत किया। इसके बाद राष्ट्रपति ने 'शंकराचार्य द्वार' से मंदिर में प्रवेश कर पूरे विधि-विधान के साथ पूजन संपन्न किया।

1. 'श्रीराम यंत्र' की स्थापना और महत्व

मंदिर के दूसरे तल (Second Floor) पर स्थापित किया गया यह 'राम यंत्र' कोई साधारण धातु की आकृति नहीं है:

  • स्वरूप: इसे ब्रह्मांडीय ऊर्जा, गणितीय सटीकता और उच्च आध्यात्मिकता का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, जैसे 'श्री यंत्र' महालक्ष्मी का स्वरूप है, वैसे ही 'श्री राम यंत्र' भगवान विष्णु के अवतार प्रभु श्री राम की विजय, मर्यादा और शांति का प्रतीक है।

  • निर्माण: इस यंत्र को तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित पवित्र मठ में विशेष वैदिक गणनाओं के आधार पर तैयार किया गया है।

  • विशेषताएं: इसका वजन 150 किलोग्राम है और इस पर शुद्ध सोने की परत (Gold Plated) चढ़ाई गई है। इसे कांचीपुरम से तिरुपति ले जाया गया और वहां से एक भव्य रथयात्रा के माध्यम से 10 दिन पहले अयोध्या लाया गया था।

2. भक्ति और परंपरा का संगम

  • भव्य स्वागत: राष्ट्रपति का स्वागत पारंपरिक ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के साथ किया गया। मंदिर परिसर को फूलों और विशेष रोशनी से सजाया गया था।

  • दर्शन पूजन: राष्ट्रपति ने रामलला की मनमोहक मूर्ति के दर्शन किए और राम परिवार की आरती उतारी। वैदिक आचार्यों की टोली ने करीब 5 घंटे तक चले विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों को संपन्न कराया।

3. सुरक्षा और सांस्कृतिक आयोजन

राष्ट्रपति के आगमन को देखते हुए पूरी अयोध्या को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। जगह-जगह सांस्कृतिक मंच बनाए गए थे जहाँ लोक कलाकारों ने रामकथा और अवध की संस्कृति का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री, केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक भी उपस्थित रहे।


निष्कर्ष: मंदिर निर्माण का एक और चरण पूर्ण

'श्रीराम यंत्र' की स्थापना मंदिर की आध्यात्मिक पूर्णता की दिशा में एक बड़ा कदम है। राष्ट्रपति द्वारा इसकी स्थापना करना राष्ट्र की आस्था और संवैधानिक गौरव के अद्भुत मिलन को दर्शाता है।

Powered by Froala Editor