बिहार की 'साड़ी वाली सुपरवुमन': निशा मिश्रा ने पारंपरिक परिधान में फतह की एशिया की सबसे कठिन बाधा दौड़
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बिहार की 'साड़ी वाली सुपरवुमन': निशा मिश्रा ने पारंपरिक परिधान में फतह की एशिया की सबसे कठिन बाधा दौड़

2, 3, 2026

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पटना। प्रतिभा किसी खास पोशाक की मोहताज नहीं होती, इसे बिहार की बेटी निशा मिश्रा ने पूरी दुनिया के सामने साबित कर दिया है। जहाँ एथलीट्स मिलीसेकंड का समय बचाने के लिए अत्याधुनिक स्पोर्ट्स गियर और 'एयरोडायनामिक' कपड़ों का सहारा लेते हैं, वहीं निशा ने एशिया की सबसे चुनौतीपूर्ण 'ऑब्स्टैकल रेस' (Obstacle Race) को साड़ी पहनकर न केवल पूरा किया, बल्कि सोशल मीडिया पर सनसनी मचा दी है।

मैदान पर 'साड़ी' का पराक्रम

निशा मिश्रा का वायरल वीडियो किसी फिल्म के स्टंट सीन जैसा प्रतीत होता है, लेकिन यह उनकी कड़ी मेहनत और संतुलन का वास्तविक परिणाम है। इस दौड़ में उन्होंने वे तमाम बाधाएं पार कीं जो अच्छे-अच्छे पेशेवरों के पसीने छुड़ा देती हैं:

  • ऊंची दीवारें और रस्सियां: 10-12 फीट ऊंची दीवारों को फांदना और रस्सियों के सहारे चढ़ना।

  • बर्फीला पानी और कीचड़: कड़कड़ाती ठंड में बर्फीले पानी के पूल में उतरना और कीचड़ भरे रास्तों पर दौड़ना।

  • जाल और बाधाएं: लटकते हुए जालों (Cargo Nets) के बीच से रास्ता बनाना। यह सब उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी साड़ी की प्लेट्स संभालते हुए किया।

"साड़ी बंधन नहीं, पहचान है"

मीडिया से बातचीत में निशा ने अपने इस अनूठे फैसले के पीछे की सोच को साझा किया। उन्होंने कहा:

"मेरा उद्देश्य उन ग्रामीण महिलाओं का प्रतिनिधित्व करना था जो सुबह से शाम तक साड़ी पहनकर खेतों और घरों में कठिन परिश्रम करती हैं। मैं दुनिया को दिखाना चाहती थी कि साड़ी हमारी कमजोरी नहीं, बल्कि हमारी शक्ति और पहचान है। कपड़े आपकी काबिलियत का पैमाना नहीं हो सकते।"

रूढ़ियों पर कड़ा प्रहार

निशा की यह उपलब्धि उन रूढ़िवादी धारणाओं को तोड़ती है जो महिलाओं की शारीरिक क्षमता को उनके पहनावे से आंकती हैं। खेल जगत में अक्सर यह माना जाता है कि पारंपरिक भारतीय परिधान दौड़ने या स्टंट करने के लिए उपयुक्त नहीं हैं, लेकिन निशा ने 'फंक्शनल फिटनेस' और 'कल्चरल प्राइड' का एक नया बेंचमार्क सेट कर दिया है।

सोशल मीडिया पर 'सुपरवुमन' का टैग

जैसे ही निशा का वीडियो इंटरनेट पर आया, वह रातों-रात वायरल हो गया।

  • यूजर्स की राय: लोग उन्हें 'रियल लाइफ वंडर वुमन' और 'साड़ी वाली सुपरवुमन' कहकर बुला रहे हैं।

  • प्रेरणा: फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने उनके इस कदम को महिला सशक्तिकरण का सबसे जीवंत उदाहरण बताया है।

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