एमपी में राजनीतिक नियुक्तियों का आगाज़: जयभान सिंह पवैया बने राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष, केके सिंह को मिली सदस्य की जिम्मेदारी
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एमपी में राजनीतिक नियुक्तियों का आगाज़: जयभान सिंह पवैया बने राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष, केके सिंह को मिली सदस्य की जिम्मेदारी

2, 3, 2026

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भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने चैत्र नवरात्र के पहले दिन गुरुवार को प्रदेश में बड़ी राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला शुरू कर दिया है। सरकार ने राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission) की कमान पूर्व मंत्री और प्रखर नेता जयभान सिंह पवैया को सौंपी है। प्रशासनिक और विधायी अनुभव के मेल वाले इस आयोग का गठन स्थानीय निकायों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया गया है।

अनुभव को प्राथमिकता: आयोग की नई टीम

सरकार ने आयोग में संतुलन साधने के लिए राजनीति के साथ-साथ प्रशासनिक विशेषज्ञों को भी जगह दी है:

  • जयभान सिंह पवैया (अध्यक्ष): भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पवैया अपनी बेबाक शैली और सांगठनिक पकड़ के लिए जाने जाते हैं। उनकी नियुक्ति को उनके लंबे राजनीतिक अनुभव के सम्मान के तौर पर देखा जा रहा है।

  • केके सिंह (सदस्य): अपर मुख्य सचिव (ACS) पद से सेवानिवृत्त हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी केके सिंह को आयोग का सदस्य बनाया गया है। उनके पास शासन और वित्त प्रबंधन का गहरा अनुभव है।

  • वीरेंद्र कुमार (सदस्य सचिव): विधानसभा के सेवानिवृत्त अपर सचिव वीरेंद्र कुमार को सदस्य सचिव की जिम्मेदारी दी गई है, जो विधायी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के समन्वय में मुख्य भूमिका निभाएंगे।

क्या होगा आयोग का मुख्य कार्य?

राज्य वित्त आयोग एक संवैधानिक संस्था है जिसका मुख्य कार्य राज्य सरकार और स्थानीय निकायों (पंचायत और नगरीय निकाय) के बीच वित्तीय संसाधनों के बंटवारे की रूपरेखा तैयार करना है।

  1. धन आवंटन की अनुशंसा: आयोग यह तय करेगा कि सरकार द्वारा संकलित करों में से कितनी राशि पंचायतों और नगर निगमों/नगर पालिकाओं को दी जानी चाहिए।

  2. आर्थिक स्थिति में सुधार: निकायों की अपनी आय बढ़ाने के स्रोतों और वित्तीय प्रबंधन को बेहतर बनाने के सुझाव देना।

  3. अधिसूचना जारी: वित्त विभाग ने इन नियुक्तियों के साथ ही आयोग के कार्यक्षेत्र और शक्तियों को भी अधिसूचित कर दिया है।

नवरात्र के साथ राजनीतिक नियुक्तियों की 'बयार'

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि पवैया की नियुक्ति के साथ ही अब राज्य के विभिन्न निगमों, मंडलों और आयोगों में अटकी हुई नियुक्तियों का रास्ता साफ हो गया है। नवरात्र के पहले दिन इस घोषणा को एक शुभ संकेत के रूप में देखा जा रहा है और आने वाले दिनों में कई अन्य वरिष्ठ नेताओं को विभिन्न बोर्डों में जिम्मेदारी मिल सकती है।

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