सूरत से मजदूरों का पलायन: ₹500 किलो पहुंचा LPG का दाम; चूल्हे ठंडे पड़े तो टेक्सटाइल सिटी छोड़ गांव लौटने लगे हजारों श्रमिक

सूरत से मजदूरों का पलायन: ₹500 किलो पहुंचा LPG का दाम; चूल्हे ठंडे पड़े तो टेक्सटाइल सिटी छोड़ गांव लौटने लगे हजारों श्रमिक

12, 2, 2026

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सूरत। 'डायमंड सिटी' और 'टेक्सटाइल हब' के नाम से मशहूर सूरत इन दिनों एक गंभीर मानवीय और औद्योगिक संकट से गुजर रहा है। पश्चिम एशिया (ईरान-इस्रायल युद्ध) में जारी संघर्ष के कारण भारत में रसोई गैस की आपूर्ति बाधित हुई है, जिसका सबसे भयावह असर सूरत के प्रवासी मजदूरों पर पड़ा है। गैस की किल्लत और ब्लैक मार्केटिंग के चलते उधना रेलवे स्टेशन पर घर लौटने वाले मजदूरों की भारी भीड़ उमड़ रही है।

₹500 प्रति किलो: भूख और महंगाई की दोहरी मार

सूरत के औद्योगिक इलाकों (सचिन, उधना, कतारगाम) में रहने वाले मजदूरों का कहना है कि गैस सिलेंडर अब आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गया है।

  • कालाबाजारी का चरम: मजदूरों ने आरोप लगाया है कि खुले बाजार में गैस ₹500 प्रति किलो तक बेची जा रही है।

  • भूख की मजबूरी: एक मजदूर सचिन ने बताया, "काम तो है, लेकिन खाना बनाने के लिए गैस नहीं है। पिछले कई दिनों से भूखे पेट रहना पड़ रहा है। अब गांव जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।"

  • किराए के कमरों में पाबंदी: कई मजदूरों ने शिकायत की है कि उनके मकान मालिकों ने कमरों के भीतर लकड़ी जलाने से मना कर दिया है, जिससे वे वैकल्पिक तरीकों से भी खाना नहीं बना पा रहे हैं।

टेक्सटाइल उद्योग पर संकट के बादल

मजदूरों के इस अचानक पलायन (Reverse Migration) ने सूरत के कपड़ा उद्योग की कमर तोड़ दी है।

  1. उत्पादन ठप: मजदूरों की कमी के कारण कई मिलों ने अपनी शिफ्ट कम कर दी है। यदि यह पलायन जारी रहा, तो आगामी त्योहारी सीजन के लिए ऑर्डर पूरे करना नामुमकिन होगा।

  2. लागत में वृद्धि: यार्न और केमिकल के दाम पहले ही 25-30% बढ़ चुके हैं, अब लेबर संकट ने इंडस्ट्री को दोहरे दबाव में डाल दिया है।

सरकारी राहत और अंतरराष्ट्रीय स्थिति

भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% LPG आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर आता है। युद्ध के कारण यह मार्ग बाधित होने से सप्लाई चेन टूट गई है।

  • RELIEF पैकेज: केंद्र सरकार ने हाल ही में प्रभावित निर्यातकों और उद्योगों के लिए ₹497 करोड़ के 'RELIEF' (Resilience & Logistics Intervention for Export Facilitation) पैकेज की घोषणा की है।

  • सप्लाई बहाल करने की कोशिश: भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत कर रही है। हाल ही में दो बड़े भारतीय गैस टैंकर (MT शिवालिक और MT नंदा देवी) सुरक्षित रूप से भारत पहुँचे हैं, जिससे आने वाले दिनों में किल्लत कम होने की उम्मीद है।

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