गुरुग्राम बच्ची दुष्कर्म मामला: सुप्रीम कोर्ट सख्त; CBI या SIT जांच की मांग वाली याचिका पर सोमवार को होगी सुनवाई

गुरुग्राम बच्ची दुष्कर्म मामला: सुप्रीम कोर्ट सख्त; CBI या SIT जांच की मांग वाली याचिका पर सोमवार को होगी सुनवाई

12, 2, 2026

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नई दिल्ली। गुरुग्राम में चार वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने हस्तक्षेप करने का निर्णय लिया है। शुक्रवार को शीर्ष अदालत ने इस भयावह घटना की CBI या विशेष जांच दल (SIT) से स्वतंत्र जांच कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। सोमवार को होने वाली यह सुनवाई इस मामले में न्याय की दिशा तय करेगी।

तीन सदस्यीय विशेष पीठ करेगी सुनवाई

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे तत्काल सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने अदालत के समक्ष मामले का विशेष उल्लेख करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए।

पुलिस पर 'लापरवाही' के गंभीर आरोप

अदालत में दलील देते हुए मुकुल रोहतगी ने पुलिस की अब तक की कार्रवाई को 'शून्य' बताया। उनकी दलीलों के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • बयान के बावजूद कार्रवाई नहीं: बच्ची ने मजिस्ट्रेट के सामने इस भयावह घटना का विस्तृत विवरण दिया है, लेकिन पुलिस ने अभी तक किसी भी मुख्य आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया है।

  • साक्ष्यों से छेड़छाड़ का डर: रोहतगी ने आरोप लगाया कि "घटनास्थल को सुरक्षित (Cordon off) नहीं किया गया और न ही सीसीटीवी फुटेज को समय रहते जब्त किया गया।"

  • घरेलू सहायिकाओं की भूमिका: याचिका में घटना में घर में काम करने वाली सहायिकाओं की संलिप्तता की आशंका भी जताई गई है।

सुप्रीम कोर्ट से 'कड़ा संदेश' देने की अपील

जब प्रधान न्यायाधीश ने शुरू में याचिकाकर्ताओं को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय (चंडीगढ़) जाने का सुझाव दिया, तो वरिष्ठ वकील ने तर्क दिया कि बच्ची का परिवार गुरुग्राम में है और इस मामले की भयावहता को देखते हुए "देश की शीर्ष अदालत से एक कड़ा संदेश जाना चाहिए।" अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए सोमवार को सुनवाई की तारीख मुकर्रर की।

मामले की गंभीरता

गुरुग्राम जैसे हाई-टेक शहर में एक मासूम के साथ ऐसी घटना और उसके बाद पुलिसिया कार्रवाई में देरी ने नागरिक सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। सोमवार को होने वाली सुनवाई में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अदालत हरियाणा पुलिस से इस मामले की स्टेटस रिपोर्ट तलब करती है या सीधे जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपती है।

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