दिल्ली के स्कूलों में 'भीड़' का संकट: 5,556 स्कूलों में 45 लाख छात्र; रिपोर्ट ने खोली बुनियादी ढांचे की पोल, सरकार ने बनाया नया लक्ष्य

दिल्ली के स्कूलों में 'भीड़' का संकट: 5,556 स्कूलों में 45 लाख छात्र; रिपोर्ट ने खोली बुनियादी ढांचे की पोल, सरकार ने बनाया नया लक्ष्य

12, 2, 2026

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नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में शिक्षा के अधिकार और बढ़ते नामांकन के बीच एक गंभीर चुनौती उभरकर सामने आई है। 'यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस' (UDISE+) 2024-25 की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के स्कूलों में छात्रों की संख्या और उपलब्ध भवनों के बीच का संतुलन बिगड़ रहा है। जहाँ एक ओर नामांकन (Enrollment) में लगातार वृद्धि हो रही है, वहीं स्कूलों की संख्या उस अनुपात में नहीं बढ़ी है।

डेटा की जुबानी: छात्रों का बोझ और शिक्षकों की स्थिति

रिपोर्ट के मुख्य आंकड़े दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था की वर्तमान तस्वीर स्पष्ट करते हैं:

  • छात्र संख्या: कुल 5,556 स्कूलों में 44.9 लाख से अधिक छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

  • प्रति स्कूल औसत: दिल्ली में एक स्कूल पर औसतन 808 छात्रों का बोझ है, जो देश के कई हिस्सों की तुलना में अधिक है।

  • शिक्षक-छात्र अनुपात: वर्तमान में 1,61,958 शिक्षक तैनात हैं, जिससे औसत अनुपात 28:1 है। हालांकि, अलग-अलग स्तरों पर यह भिन्न है:

    • आधारभूत स्तर (Foundational): 14:1

    • प्रारंभिक स्तर (Primary): 18:1

    • माध्यमिक स्तर (Secondary): 19:1

    • मध्य स्तर (Middle): 28:1 (यहाँ शिक्षकों पर सबसे अधिक दबाव है)।

बुनियादी ढांचा और डिजिटल डिवाइड

रिपोर्ट में स्कूलों की सुविधाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण खुलासे किए गए हैं:

  • सरकारी निर्भरता: कुल 5,556 स्कूलों में से 2,681 सरकारी संस्थान हैं, जो यह दर्शाता है कि बड़ी आबादी सार्वजनिक ढांचे पर निर्भर है।

  • एकल-शिक्षक स्कूल: चिंता का विषय यह है कि 1,089 छात्र ऐसे स्कूलों में पढ़ रहे हैं जहाँ केवल एक शिक्षक तैनात है।

  • डिजिटल पुस्तकालय: डिजिटल क्रांति के दौर में भी केवल 430 स्कूलों में डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध है।

  • पर्यावरण: 1,844 स्कूलों में सौर पैनल (Solar Panels) लगाए गए हैं, जो एक सकारात्मक कदम है।

  • स्वच्छता: लगभग 4,700+ स्कूलों में बालक-बालिका शौचालयों की स्थिति संतोषजनक पाई गई है।

छात्राओं की बढ़ती भागीदारी: शिक्षा में 'बेटी' आगे

रिपोर्ट का सबसे सुखद पहलू छात्राओं का नामांकन अनुपात है। माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का भागीदारी अनुपात 95.7% है, जो लड़कों के 88.3% की तुलना में काफी बेहतर है। हर स्तर पर (आधारभूत से माध्यमिक) लड़कियों की संख्या लड़कों के मुकाबले अधिक दर्ज की गई है।

सरकार का मास्टर प्लान: 2026-27 के लिए बड़े लक्ष्य

भीड़ और बढ़ते नामांकन को देखते हुए दिल्ली सरकार ने भविष्य की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार ने 2026-27 तक निम्नलिखित लक्ष्य निर्धारित किए हैं:

  1. 50 नए स्कूल भवन का निर्माण।

  2. 8,000 अतिरिक्त कक्षाओं का निर्माण ताकि मौजूदा स्कूलों पर से बोझ कम किया जा सके।

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