हजारीबाग: ओमान में सड़क हादसे में झारखंड के 24 वर्षीय युवक की मौत; अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर लौटते समय हुआ हादसा

हजारीबाग: ओमान में सड़क हादसे में झारखंड के 24 वर्षीय युवक की मौत; अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर लौटते समय हुआ हादसा

12, 2, 2026

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हजारीबाग (झारखंड)। रोजगार की तलाश में ओमान (मस्कट) गए हजारीबाग के एक होनहार युवक की सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई। 24 वर्षीय प्रदीप कुमार, जो अपने परिवार का सहारा बनने विदेश गया था, अब तिरंगे में लिपटकर स्वदेश लौटेगा। इस घटना के बाद बिष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के 'जबर' गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

कैसे हुआ हादसा?

सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली और मृतक के पिता पुनस महतो से मिली जानकारी के अनुसार, घटनाक्रम कुछ इस प्रकार रहा:

  • बीमारी से जंग जीती, सड़क ने ली जान: प्रदीप कुमार ओमान में एक निजी कंपनी में ट्रांसमिशन लाइन बिछाने का काम करता था। कुछ दिन पहले वह गंभीर रूप से बीमार पड़ गया था। अस्पताल में सफल इलाज के बाद बुधवार रात वह डिस्चार्ज होकर अपने आवास की ओर लौट रहा था।

  • टक्कर: सड़क पार करते समय एक तेज रफ्तार वाहन ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। हादसा इतना भीषण था कि प्रदीप ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

शव को वापस लाने की कवायद शुरू

बेटे की मौत की खबर मिलते ही परिजनों ने हजारीबाग जिला प्रशासन और राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष से गुहार लगाई है।

  1. प्रशासनिक सक्रियता: राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष की अधिकारी शिखा लाकरा ने बताया कि मामले की सूचना मिलते ही ओमान स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास और संबंधित कंपनी से संपर्क साधा गया है।

  2. दस्तावेजी प्रक्रिया: मृतक के परिजनों से आवश्यक दस्तावेज मांगे गए हैं ताकि कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर शव को जल्द से जल्द हजारीबाग लाया जा सके।

प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर सवाल

झारखंड के गिरिडीह, हजारीबाग और बोकारो जैसे जिलों से बड़ी संख्या में युवक खाड़ी देशों में मजदूरी के लिए जाते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली ने सरकार से मांग की है कि ऐसे मामलों में प्रवासी मजदूरों के परिवारों को उचित मुआवजा और कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए एक ठोस नीति होनी चाहिए।

परिवार की उम्मीदें टूटीं

प्रदीप अपने पीछे वृद्ध माता-पिता और परिवार को छोड़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रदीप बहुत ही मिलनसार और मेहनती युवक था। वह घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के सपने लेकर मस्कट गया था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

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