ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट: राहुल गांधी से मिला निकोबार का जनजातीय प्रतिनिधिमंडल; विस्थापन और पर्यावरण के विनाश पर जताई बड़ी चिंता

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट: राहुल गांधी से मिला निकोबार का जनजातीय प्रतिनिधिमंडल; विस्थापन और पर्यावरण के विनाश पर जताई बड़ी चिंता

12, 2, 2026

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श्री विजय पुरम/नई दिल्ली। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के मूल निवासियों और पर्यावरणविदों के बीच चर्चा का केंद्र बनी 'ग्रेट निकोबार द्वीप समूह बुनियादी ढांचा परियोजना' का मामला अब संसद के गलियारों तक पहुँच गया है। निकोबार जिले की जनजातीय परिषद के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर अपनी आशंकाएं और आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

विकास बनाम विनाश: प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख मांगें

मुलाकात के दौरान आदिवासी नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन जिस कीमत पर यह प्रोजेक्ट लाया जा रहा है, वह असहनीय है। प्रतिनिधिमंडल ने निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर जोर दिया:

  • पारिस्थितिकी का क्षरण: ग्रेट निकोबार का नाजुक ईको-सिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) इस विशाल निर्माण को झेलने में सक्षम नहीं है।

  • आदिवासियों का विस्थापन: प्रोजेक्ट के कारण मूल निवासी समुदायों को अपनी पैतृक जमीन से बेदखल होना पड़ सकता है, जिससे वे अपनी पहचान और आजीविका खो देंगे।

  • पारंपरिक अधिकार: प्रतिनिधियों ने मांग की कि कोई भी विकास कार्य मूल समुदायों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा की शर्त पर ही होना चाहिए।

राहुल गांधी का आश्वासन: "जमीनी हकीकत समझने जल्द आऊंगा अंडमान"

बैठक में अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया भी मौजूद थे। कांग्रेस द्वारा जारी बयान के अनुसार:

  1. गंभीरता से सुनी बात: राहुल गांधी ने प्रतिनिधिमंडल की चिंताओं को धैर्यपूर्वक सुना और स्वीकार किया कि मुद्दे काफी गंभीर हैं।

  2. संसद में गूँजेगी आवाज: गांधी ने आश्वासन दिया कि वे इन संवेदनशील मुद्दों को उचित मंचों (संसद और समितियों) पर उठाएंगे।

  3. दौरे का संकेत: उन्होंने जल्द ही अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का दौरा करने की इच्छा जताई है, ताकि वे वहां के लोगों से सीधे संवाद कर जमीनी हकीकत को बेहतर ढंग से समझ सकें।

क्या है ग्रेट निकोबार परियोजना?

यह केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी मेगा परियोजना है, जिसके तहत ग्रेट निकोबार द्वीप पर:

  • एक अंतर्राष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (ICTT) का निर्माण।

  • एक ग्रीनफील्ड अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा

  • एक गैस और सौर-आधारित पावर प्लांट

  • और एक नया इको-टूरिज्म शहर बसाने की योजना है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹72,000 करोड़ है, लेकिन इसके लिए हजारों हेक्टेयर जंगल की कटाई और कछुओं के प्रजनन स्थलों के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

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