नमन: वीरांगना अवंती बाई लोधी के बलिदान दिवस पर CM योगी ने दी श्रद्धांजलि; बोले- "उनका साहस भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय"

नमन: वीरांगना अवंती बाई लोधी के बलिदान दिवस पर CM योगी ने दी श्रद्धांजलि; बोले- "उनका साहस भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय"

12, 2, 2026

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की अमर नायिका रानी अवंती बाई लोधी के बलिदान दिवस (20 मार्च) पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री ने वीरांगना के शौर्य को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन आज की 'नारी शक्ति' और भावी पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति का एक अनुपम उदाहरण है।

CM योगी का संदेश: "राष्ट्र-स्वाभिमान की अमर प्रतीक"

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए लिखा:

"1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना, राष्ट्र-स्वाभिमान की अमर प्रतीक रानी अवंती बाई लोधी के बलिदान दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि। मातृभूमि की रक्षा हेतु उनका अद्वितीय साहस, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है।"

भाजपा नेतृत्व और उप-मुख्यमंत्री ने भी किया नमन

  • पंकज चौधरी (प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा): उन्होंने रानी अवंती बाई के अंग्रेजों के खिलाफ निडर संघर्ष को याद करते हुए कहा कि देश उनके असाधारण बलिदान को सदैव याद रखेगा।

  • केशव प्रसाद मौर्य (उप-मुख्यमंत्री): उन्होंने वीरांगना को अदम्य साहस और शौर्य का प्रतीक बताया और कहा कि उनका इतिहास सदैव स्वाभिमान की प्रेरणा देता रहेगा।

इतिहास के पन्नों में रानी अवंती बाई लोधी

रानी अवंती बाई लोधी का जीवन संघर्ष और वीरता की एक ऐसी गाथा है जो आज भी रोंगटे खड़े कर देती है:

  • जन्म और प्रारंभिक जीवन: उनका जन्म 16 अगस्त 1831 को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के मनकेहनी गांव में हुआ था। बचपन से ही उन्होंने तलवारबाजी और घुड़सवारी में निपुणता हासिल कर ली थी।

  • रामगढ़ की रानी: उनका विवाह रामगढ़ के राजा विक्रमादित्य सिंह से हुआ था। राजा के अस्वस्थ होने पर उन्होंने राज्य का कार्यभार संभाला।

  • 1857 की क्रांति: जब अंग्रेजों ने 'डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स' के तहत रामगढ़ को हड़पने की कोशिश की, तो रानी ने हथियार उठा लिए। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ कई युद्ध जीते।

  • सर्वोच्च बलिदान: 20 मार्च 1858 को, जब वे चारों ओर से अंग्रेज सेना से घिर गईं, तो गुलामी स्वीकार करने के बजाय उन्होंने अपनी ही तलवार से मातृभूमि की रक्षा में प्राण न्योछावर कर दिए।

नारी शक्ति की प्रेरणा

आज के दौर में जब 'नारी शक्ति' को सशक्त बनाने की बात होती है, तब रानी अवंती बाई लोधी का बलिदान यह याद दिलाता है कि भारतीय वीरांगनाओं ने सदियों पहले अपनी वीरता से साम्राज्य हिला दिए थे। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में आज उनके सम्मान में कई कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।

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