पिटकुल MD नियुक्ति विवाद: उत्तराखंड के प्रमुख सचिव (ऊर्जा) हाईकोर्ट में पेश; अवमानना याचिका पर दो हफ्ते में मांगा जवाब

पिटकुल MD नियुक्ति विवाद: उत्तराखंड के प्रमुख सचिव (ऊर्जा) हाईकोर्ट में पेश; अवमानना याचिका पर दो हफ्ते में मांगा जवाब

12, 2, 2026

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नैनीताल। पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) के प्रबंध निदेशक की नियुक्ति में नियमों की अनदेखी का मामला अब उत्तराखंड उच्च न्यायालय की शक्ति का सामना कर रहा है। अदालत के आदेश की अवहेलना के आरोप में प्रमुख सचिव (ऊर्जा) आर. मीनाक्षी सुंदरम को बृहस्पतिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की एकलपीठ के समक्ष पेश होना पड़ा।

क्या है पूरा विवाद?

यह मामला देहरादून निवासी अनिल बलूनी व अन्य द्वारा दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। याचिका के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • नियमों का उल्लंघन: उच्च न्यायालय ने पाया था कि प्रकाश चंद ध्यानी की पिटकुल के प्रबंध निदेशक (MD) पद पर नियुक्ति नियम-2021 (नियम 9-ए) का उल्लंघन थी। इस पद के लिए 'इंजीनियरिंग स्नातक' होना अनिवार्य है, जबकि ध्यानी के पास कथित तौर पर यह योग्यता नहीं थी।

  • नियुक्ति रद करने का आदेश: कोर्ट ने 18 फरवरी 2026 को ही इस नियुक्ति को अवैध करार देते हुए सरकार को नियमों के अनुसार पुनर्विचार करने का आदेश दिया था।

सरकार का पक्ष: "हटा दिया गया है"

सुनवाई के दौरान प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने अदालत को सूचित किया कि सरकार ने कोर्ट के आदेश का सम्मान किया है और 26 फरवरी 2026 को प्रकाश चंद ध्यानी को प्रबंध निदेशक के पद से हटा दिया गया है। वर्तमान में मेहरबान बिष्ट को इस पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

याचिकाकर्ताओं के गंभीर आरोप: "पिछली तारीख से आदेश जारी"

दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं के वकील ने सरकार के दावों को चुनौती देते हुए दलील दी कि:

  1. बैक डेट का खेल: ध्यानी को हटाने का आदेश पिछली तारीख (Back-date) से लागू दिखाया गया है ताकि कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।

  2. पद पर कब्जा: आरोप लगाया गया कि कागज पर प्रभार किसी और के पास है, लेकिन ध्यानी अभी भी प्रबंध निदेशक के रूप में सभी प्रशासनिक कार्यों का निर्वहन कर रहे हैं।

अगली सुनवाई 30 अप्रैल को

उच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रमुख सचिव (ऊर्जा) को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। अदालत अब इस बात की जांच करेगी कि क्या वास्तव में कोर्ट के आदेश का पालन हुआ है या यह केवल कागजी खानापूर्ति है। मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल 2026 को तय की गई है।

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