हजारीबाग: पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के घर पर चला 'बुलडोजर'; NTPC परियोजना के लिए प्रशासन ने ढहाया आवास, मुआवजे पर था विवाद

हजारीबाग: पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के घर पर चला 'बुलडोजर'; NTPC परियोजना के लिए प्रशासन ने ढहाया आवास, मुआवजे पर था विवाद

12, 2, 2026

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हजारीबाग (झारखंड)। झारखंड के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता योगेंद्र साव के केरेडारी स्थित आवास को प्रशासन ने बृहस्पतिवार को जमींदोज कर दिया। एनटीपीसी (NTPC) की कोयला खनन परियोजना के रास्ते में आ रहे इस निर्माण को हटाने के लिए प्रशासन ने तीन जेसीबी मशीनों और भारी पुलिस बल का सहारा लिया। लंबे समय से चल रहे इस भूमि विवाद में प्रशासन की इस कड़ी कार्रवाई ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

क्यों हुई यह कार्रवाई? (प्रशासन का पक्ष)

जिला भूमि अधिग्रहण अधिकारी (DLAO) निर्भय कुमार और बरकागांव के एसडीपीओ पवन कुमार ने इस कार्रवाई के पीछे कानूनी आधार स्पष्ट किए:

  • सीबी अधिनियम का उल्लंघन: प्रशासन के अनुसार, यह मामला 'कोयला युक्त क्षेत्र अधिनियम' (Coal Bearing Areas Act) के उल्लंघन से संबंधित है।

  • मुआवजे का पेंच: एनटीपीसी ने अपनी परियोजना के लिए जमीन मालिकों को मुआवजा आवंटित कर दिया था। साव के हिस्से की लगभग 1,500 वर्ग फीट जमीन का कब्जा एनटीपीसी को चाहिए था, लेकिन पूर्व मंत्री मुआवजा लेने को तैयार नहीं थे।

  • कब्जा हस्तांतरण: कानूनन जमीन का कब्जा एनटीपीसी को सौंपने के लिए घर को गिराना अनिवार्य हो गया था।

धरना और विरोध: साव परिवार की दलील

कार्रवाई से पहले योगेंद्र साव और उनकी पत्नी (पूर्व विधायक निर्मला देवी) कई दिनों से अपने आवास पर धरना दे रहे थे। उनकी मुख्य मांगें थीं:

  1. मुआवजे में वृद्धि: साव परिवार प्रस्तावित मुआवजे की राशि को कम बता रहा था और इसमें बढ़ोतरी की मांग कर रहा था।

  2. विस्थापन का मुद्दा: परिवार का तर्क था कि बिना उचित समाधान के उनके पुश्तैनी ठिकाने को उजाड़ा जा रहा है।

अब आगे क्या?

विध्वंस की इस कार्रवाई के बाद योगेंद्र साव के परिवार ने कड़ा रुख अपनाया है। सोशल मीडिया के माध्यम से परिवार ने संदेश दिया है कि वे प्रशासन के इस 'एकतरफा' कदम के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। हालांकि, प्रशासन का दावा है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत की गई है और मौके पर स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है।

राजनीतिक प्रभाव

योगेंद्र साव बरकागांव और हजारीबाग क्षेत्र के कद्दावर नेता माने जाते हैं। विस्थापन और एनटीपीसी के खिलाफ उनके आंदोलन का एक लंबा इतिहास रहा है। ऐसे में उनके घर पर हुई इस कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक ध्रुवीकरण होने की संभावना है।

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