हिमाचल पुलिस में 'खाकी' दागदार: करोड़ों की ड्रग तस्करी में CID के 4 सब-इंस्पेक्टर गिरफ्तार; तस्करों से मिलीभगत का सनसनीखेज खुलासा

हिमाचल पुलिस में 'खाकी' दागदार: करोड़ों की ड्रग तस्करी में CID के 4 सब-इंस्पेक्टर गिरफ्तार; तस्करों से मिलीभगत का सनसनीखेज खुलासा

12, 2, 2026

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शिमला। देवभूमि हिमाचल प्रदेश को नशा मुक्त करने के अभियान के बीच एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। शिमला पुलिस ने मादक पदार्थों की तस्करी में संलिप्तता के आरोप में राज्य अपराध जांच विभाग (CID) के चार सेवारत सब-इंस्पेक्टरों को गिरफ्तार किया है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि वे उन तस्करों की मदद कर रहे थे, जो करोड़ों रुपये के नशीले पदार्थों का काला कारोबार कर रहे थे।

कैसे हुआ खुलासा? (3 मार्च की वो गिरफ्तारी)

इस पूरे मामले की कड़ी 3 मार्च को हुई एक गिरफ्तारी से जुड़ी है:

  • बड़ी खेप बरामद: जिला पुलिस ने दो व्यक्तियों को भारी मात्रा में ड्रग्स के साथ दबोचा था, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 1.1 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई थी।

  • कॉल डिटेल और जांच: जब पुलिस ने गिरफ्तार तस्करों के फोन और संपर्कों की गहन जांच की, तो कड़ियां सीधे सीआईडी के इन चार अधिकारियों से जा मिलीं। जांच में स्पष्ट हुआ कि ये अधिकारी तस्करों को सुरक्षित रास्ता देने और जानकारी साझा करने के बदले मिलीभगत कर रहे थे।

गिरफ्तार अधिकारियों की पहचान

गिरफ्तार किए गए चारों आरोपी कुल्लू जिले के रहने वाले हैं और सीआईडी में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे:

  1. राजेश कुमार (40): निवासी 14 माइल गांव, कुल्लू।

  2. समीर (40): निवासी भुंतर, कुल्लू।

  3. नितेश (46): निवासी बाजाउरा गांव, कुल्लू।

  4. अशोक कुमार (42): निवासी कुल्लू।

कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई: निलंबन से गिरफ्तारी तक

शिमला के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) अभिषेक धीमान ने बताया कि शिमला पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर एडीजीपी (सीआईडी) ने 16 मार्च को ही इन चारों को निलंबित कर दिया था। विभागीय जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद बृहस्पतिवार को इन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।

अगला कदम

पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस रैकेट में विभाग के कुछ और बड़े अधिकारी या कर्मचारी शामिल हैं। आरोपियों को शुक्रवार को अदालत में पेश किया जाएगा, जहाँ पुलिस उनकी रिमांड की मांग करेगी ताकि तस्करी के पूरे नेटवर्क और लेन-देन के स्रोतों का पता लगाया जा सके।

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