इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पुलिस की 'गलत जानकारी' पर UP सरकार को ₹50,000 हर्जाना भरने का आदेश; आरोपी को 15 दिन ज्यादा काटनी पड़ी जेल

इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पुलिस की 'गलत जानकारी' पर UP सरकार को ₹50,000 हर्जाना भरने का आदेश; आरोपी को 15 दिन ज्यादा काटनी पड़ी जेल

12, 2, 2026

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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली और रिकॉर्ड प्रबंधन में लापरवाही पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सख्त नाराजगी जताई है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह एक आरोपी को 50,000 रुपये का हर्जाना दे, क्योंकि पुलिस द्वारा उसके आपराधिक इतिहास के बारे में गलत जानकारी देने के कारण उसकी जमानत में 15 दिनों की देरी हुई।

क्या है मामला? (फुरकान बनाम उत्तर प्रदेश राज्य)

यह मामला फुरकान नामक व्यक्ति से जुड़ा है, जिसे पिछले साल नवंबर में कार चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी:

  • पुलिस का दावा: पुलिस ने अदालत में दलील दी थी कि फुरकान के खिलाफ 12 आपराधिक मामले दर्ज हैं, ताकि उसकी जमानत याचिका का विरोध किया जा सके।

  • सच्चाई: जांच में सामने आया कि आरोपी के खिलाफ केवल 5 मामले थे, जिनकी जानकारी उसने खुद पहले ही दे दी थी।

  • अदालत का निष्कर्ष: पुलिस की इस गलत जानकारी की वजह से फुरकान 23 फरवरी को रिहा हो सकता था, लेकिन वह 15 दिन अतिरिक्त जेल में रहा। अदालत ने इसे 'लापरवाही' करार देते हुए हर्जाने का आदेश दिया।

ADG (तकनीकी सेवा) ने मानी गलती

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने अपर महानिदेशक (तकनीकी सेवा) नवीन अरोड़ा को तलब किया था। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए अरोड़ा ने स्वीकार किया कि:

  1. जांच अधिकारी की चूक: सीसीटीएनएस (CCTNS) प्रणाली के बावजूद जांच अधिकारी ने रिकॉर्ड जांचने में गलती की।

  2. सुविधा का उपयोग नहीं: उन्होंने बताया कि केस डायरी तक पहुंच की डिजिटल सुविधा होने के बावजूद, संयुक्त निदेशक (अभियोजन) कार्यालय ने कर्मचारियों की कमी का हवाला देकर इसका लाभ लेने से मना कर दिया था।

हाईकोर्ट के कड़े निर्देश

अदालत ने केवल हर्जाना ही नहीं लगाया, बल्कि भविष्य के लिए महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए:

  • कर्मचारियों की कमी दूर करें: निदेशक (अभियोजन) को निर्देश दिया गया है कि वे संयुक्त निदेशक कार्यालय में पर्याप्त स्टाफ सुनिश्चित करें ताकि डिजिटल केस डायरी और आईसीजेएस (ICJS) प्रणाली का प्रभावी उपयोग हो सके।

  • हर्जाने की अवधि: राज्य सरकार को एक महीने के भीतर 50,000 रुपये की राशि याचिकाकर्ता (फुरकान) को भुगतान करनी होगी।

व्यक्तिगत स्वतंत्रता बनाम प्रशासनिक बोझ

हालांकि अदालत ने माना कि जांच अधिकारी ने यह काम 'दुर्भावनावश' नहीं बल्कि 'काम के बोझ' और लापरवाही के कारण किया, लेकिन पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक कमियों की कीमत किसी नागरिक को अपनी स्वतंत्रता खोकर नहीं चुकानी चाहिए।

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