ईरान-इजराइल युद्ध: 'बसीज' के जमीनी नेटवर्क पर इजराइल का ड्रोन हमला; कमांडर की मौत के बाद अब चौकियों को बनाया निशाना
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ईरान-इजराइल युद्ध: 'बसीज' के जमीनी नेटवर्क पर इजराइल का ड्रोन हमला; कमांडर की मौत के बाद अब चौकियों को बनाया निशाना

12, 2, 2026

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तेहरान/बेरूत। पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध के बीच इजराइल ने ईरान की सत्ता के सबसे वफादार अर्धसैनिक बल 'बसीज' के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। मंगलवार को बसीज के शीर्ष कमांडर जनरल गुलाम रजा सुलेमानी की हत्या के बाद, शुक्रवार को इजराइली ड्रोनों ने तेहरान के आसपास स्थित बसीज की कई सुरक्षा चौकियों को निशाना बनाया। इजराइल और अमेरिका का स्पष्ट उद्देश्य लगातार बमबारी के जरिए ईरान की सत्ता के सुरक्षा कवच को तोड़ना और सुरक्षा बलों का मनोबल गिराना है।

बसीज बल ही क्यों है निशाने पर?

बसीज, जो कि इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की एक स्वयंसेवी शाखा है, ईरान सरकार के लिए 'सुरक्षा की पहली दीवार' मानी जाती है:

  • विरोध प्रदर्शनों का दमन: इस बल ने जनवरी में हुए देशव्यापी सरकार विरोधी प्रदर्शनों को कुचलने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

  • वैचारिक वफादारी: बसीज का मुख्य कार्य समाज के भीतर सरकार के प्रति वफादारी सुनिश्चित करना और आंतरिक विद्रोह को रोकना है।

  • इजराइल की रणनीति: विशेषज्ञों का मानना है कि निचले स्तर के सदस्यों पर हमले कर इजराइल उन्हें बल छोड़ने या सेवा से इनकार करने के लिए मजबूर करना चाहता है।

क्या हमलों से टूटेगी बसीज की पकड़?

सैन्य विशेषज्ञों और निगरानी समूहों के अनुसार, हमलों के बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है:

  1. विकेंद्रीकृत प्रणाली: ईरान मामलों के विशेषज्ञ हामिद रजा अजीजी के अनुसार, बसीज एक अत्यधिक विकेंद्रीकृत बल है। इसकी इकाइयां स्वायत्त रूप से काम करती हैं, इसलिए शीर्ष नेतृत्व की हत्या से इसके जमीनी कामकाज पर कोई बड़ा असर पड़ने की उम्मीद कम है।

  2. प्रतीकात्मक नेतृत्व: बसीज प्रमुख का चयन उनकी सैन्य विशेषज्ञता के बजाय 'वैचारिक कट्टरता' और 'सर्वोच्च नेता' के प्रति अटूट निष्ठा के आधार पर किया जाता है।

  3. जनता का रुख: फिलहाल ऐसे कोई संकेत नहीं हैं कि ईरानी जनता अमेरिका या इजराइल की अपील पर सरकार के खिलाफ खड़ी हो रही है। लोग विरोध के बजाय हवाई हमलों से बचने के लिए सुरक्षित स्थानों की तलाश कर रहे हैं।

ईरान के भीतर कड़ा पहरा

तेहरान में सुरक्षा बलों की मौजूदगी अब भी बेहद सख्त है। सरकार ने इंटरनेट पर पाबंदियां लगा रखी हैं और हमलों के वीडियो बनाने या बाहरी दुनिया से संपर्क करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। युद्ध पर नजर रखने वाले समूहों का कहना है कि ईरान के भीतर डर का माहौल बना हुआ है, लेकिन शासन की पकड़ अब भी मजबूत है।


प्रमुख सैन्य तथ्य: एक नज़र में

  • हमलों का अनुपात: युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक के एक-तिहाई हमले सीधे IRGC और बसीज के ठिकानों पर हुए हैं।

  • बड़ी क्षति: पिछले सप्ताह से बसीज की छोटी चौकियों को निशाना बनाने से निचले स्तर के सदस्यों में खतरा बढ़ गया है।

  • इजराइल का लक्ष्य: सत्ता के स्तंभों को कमजोर करना और सैन्य नेतृत्व का मनोबल तोड़ना।

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