वैश्विक ऊर्जा युद्ध: ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद इजराइल ने रोके ईरान के गैस क्षेत्रों पर हमले, $119 पर पहुँचा कच्चा तेल

वैश्विक ऊर्जा युद्ध: ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद इजराइल ने रोके ईरान के गैस क्षेत्रों पर हमले, $119 पर पहुँचा कच्चा तेल

12, 2, 2026

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दुबई/यरूशलेम: मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष अब एक खतरनाक 'ऊर्जा युद्ध' (Energy War) में तब्दील हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यक्तिगत अपील के बाद इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के प्रमुख प्राकृतिक गैस क्षेत्रों पर और हमले न करने का वादा किया है। हालांकि, यह घोषणा तब आई है जब ईरान पहले ही खाड़ी क्षेत्र के तेल प्रतिष्ठानों और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों को निशाना बनाकर वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ चुका है।

प्रमुख घटनाक्रम और सामरिक विश्लेषण:

  • होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर संकट: दुनिया के 20% तेल परिवहन का मार्ग अब युद्ध का मैदान बन गया है। ईरान द्वारा यहाँ किए जा रहे अवरोधों और जहाजों पर ड्रोन हमलों ने वैश्विक सप्लाई चेन को ठप कर दिया है। संयुक्त अरब अमीरात और कतर के पास जहाजों का क्षतिग्रस्त होना इस बात का प्रमाण है कि यह युद्ध अब केवल दो देशों के बीच नहीं रहा।

  • नेतन्याहू का बड़ा दावा: इजराइली प्रधानमंत्री ने दावा किया है कि 28 फरवरी से जारी हमलों ने ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमता को नष्ट कर दिया है। हालांकि, बिना किसी ठोस प्रमाण के किया गया यह दावा मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) का हिस्सा भी हो सकता है, क्योंकि मुजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान अब भी सऊदी अरब की रिफाइनरियों पर सटीक ड्रोन हमले करने में सक्षम दिख रहा है।

  • आर्थिक सुनामी: 'ब्रेंट क्रूड' की कीमतों में 60% से अधिक का उछाल वैश्विक महंगाई को अनियंत्रित कर सकता है। $119 प्रति बैरल की कीमत विकासशील देशों, विशेषकर भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए एक बड़ा आर्थिक झटका है।

  • कूटनीतिक दबाव: राष्ट्रपति ट्रंप का अनुरोध दर्शाता है कि अमेरिका चुनाव या घरेलू आर्थिक दबाव के कारण तेल की कीमतों को और अधिक बढ़ते नहीं देखना चाहता। लेकिन क्या ईरान इस 'युद्धविराम' (सीमित हमलों पर रोक) का सम्मान करेगा, यह एक बड़ा सवाल है।

भविष्य की आशंकाएं:

यदि ईरान ने अरब देशों के तेल बुनियादी ढांचे पर हमले जारी रखे, तो सऊदी अरब और यूएई जैसे देश, जो अब तक तटस्थ रहने की कोशिश कर रहे थे, सीधे इस युद्ध में कूद सकते हैं। यह स्थिति तीसरे विश्व युद्ध की आहट जैसी हो सकती है।

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