नेतन्याहू का बड़ा एलान: 'ईरान पस्त, अब मिशन नए आर्थिक गलियारे का'—ट्रंप के साथ रणनीतिक तालमेल पर तोड़ी चुप्पी

नेतन्याहू का बड़ा एलान: 'ईरान पस्त, अब मिशन नए आर्थिक गलियारे का'—ट्रंप के साथ रणनीतिक तालमेल पर तोड़ी चुप्पी

12, 2, 2026

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यरूशलेम: इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया है कि 20 दिनों के भीषण युद्ध के बाद ईरान की कमर टूट चुकी है। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इजराइल का सैन्य अभियान अपने अंतिम लक्ष्यों की ओर है और अब ध्यान युद्ध के बाद की स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर केंद्रित है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि इजराइल और अमेरिका के बीच का तालमेल किसी भी पिछले प्रशासन की तुलना में सबसे अधिक 'सिंक्रोनाइज़्ड' (तालमेल युक्त) है।

विस्तृत विश्लेषण और मुख्य बातें:

  • ईरान की सैन्य क्षमता पर चोट: नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान अब न तो यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) करने की स्थिति में है और न ही बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की। उनके अनुसार, इजराइली हमलों ने उन फैक्ट्रियों को निशाना बनाया है जो इन हथियारों के पुर्जे बनाती थीं।

  • ट्रंप-नेतन्याहू 'जुगलबंदी': अमेरिका को युद्ध में घसीटने के आरोपों को खारिज करते हुए नेतन्याहू ने कहा, "क्या कोई वास्तव में सोचता है कि राष्ट्रपति ट्रंप को कोई बता सकता है कि उन्हें क्या करना है?" उन्होंने पुष्टि की कि ट्रंप के अनुरोध पर ही उन्होंने ईरान के गैस क्षेत्रों पर आगे हमले रोके हैं, जो दोनों नेताओं के बीच गहरे भरोसे को दर्शाता है।

  • होर्मुज का विकल्प - 'इजराइल रूट': होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से उपजे संकट का समाधान पेश करते हुए नेतन्याहू ने एक विजन रखा। उन्होंने सुझाव दिया कि अरब प्रायद्वीप से होते हुए सीधे इजराइल और भूमध्यसागरीय बंदरगाहों तक पाइपलाइनें बिछाई जानी चाहिए, ताकि दुनिया को कभी भी ईरान जैसे 'चोक पॉइंट्स' (रुकावट वाले मार्गों) का बंधक न बनना पड़े।

  • बाजार को उम्मीद: अगर अमेरिका इस समुद्री मार्ग को सुरक्षित खोलने में सफल रहता है, तो $119 प्रति बैरल तक पहुँच चुका कच्चा तेल वापस नीचे आ सकता है, जिससे भारत सहित पूरी दुनिया को महंगाई से राहत मिलेगी।

निष्कर्ष:

नेतन्याहू का यह संबोधन केवल युद्ध की प्रगति रिपोर्ट नहीं थी, बल्कि ईरान के प्रभाव को स्थायी रूप से समाप्त करने और इजराइल को मध्य-पूर्व के 'एनर्जी हब' के रूप में स्थापित करने का एक रोडमैप था।

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