हरियाणा राज्यसभा चुनाव में 'पॉलिटिकल हंटिंग' का आरोप: हुड्डा ने राज्यपाल से की भाजपा की शिकायत; 'क्रॉस-वोटिंग' और धांधली पर बढ़ा बवाल
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हरियाणा राज्यसभा चुनाव में 'पॉलिटिकल हंटिंग' का आरोप: हुड्डा ने राज्यपाल से की भाजपा की शिकायत; 'क्रॉस-वोटिंग' और धांधली पर बढ़ा बवाल

12, 2, 2026

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चंडीगढ़: हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने राज्यसभा चुनाव में सत्ताधारी भाजपा पर "राजनीतिक शिकारी" (Political Hunter) की तरह व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगाया है। कांग्रेस के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल असीम कुमार घोष से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें निर्दलीय उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग और विधायकों को डराने-धमकझाने का दावा किया गया है।

विवाद के मुख्य बिंदु और विश्लेषण:

  • निर्वाचन अधिकारी पर सवाल: कांग्रेस ने केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि आईएएस अधिकारी और निर्वाचन अधिकारी पंकज अग्रवाल की भूमिका को भी 'पक्षपातपूर्ण' बताया है। हालांकि, अग्रवाल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई है।

  • बौद्ध की जीत और सतीश नांदल का फैक्टर: सोमवार को हुई वोटिंग में भाजपा के संजय भाटिया ने आसानी से जीत दर्ज की, लेकिन दूसरी सीट पर कड़ा मुकाबला रहा। कांग्रेस के करमवीर सिंह बौद्ध ने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को मामूली अंतर से हराया। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा ने नांदल को जिताने के लिए प्रलोभन और अनुचित सौदेबाजी का सहारा लिया।

  • अपनों से भी खतरा? 'क्रॉस-वोटिंग' की छाया: कांग्रेस के लिए सबसे चिंताजनक बात यह रही कि उसके अपने 5 विधायकों पर 'क्रॉस-वोटिंग' के आरोप लगे हैं। हुड्डा ने स्वीकार किया कि भाजपा ने फूट डालने की कोशिश की, लेकिन अंततः कांग्रेस उम्मीदवार की जीत हुई।

  • संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग: रघुवीर सिंह कादियान जैसे वरिष्ठ नेताओं ने इस पूरी प्रक्रिया को "अलोकतांत्रिक" करार देते हुए राज्यपाल से इस अनैतिक आचरण की उच्च स्तरीय जांच के आदेश देने की मांग की है।

राजनीतिक मायने:

यह विवाद ऐसे समय में आया है जब हरियाणा में विधानसभा चुनाव भी नजदीक हैं। राज्यसभा चुनाव के बहाने कांग्रेस जनता के बीच यह संदेश देना चाहती है कि भाजपा लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है। वहीं, भाजपा इसे कांग्रेस की 'हार की हताशा' बता सकती है, भले ही उनके समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार की हार हुई हो।

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