आधी रात से लाइन, 8 किमी पैदल सफर: बीमार मां-बाप के लिए एक 'माली' का संघर्ष; बाराबंकी में गैस सिलेंडर की किल्लत की मार्मिक तस्वीर
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आधी रात से लाइन, 8 किमी पैदल सफर: बीमार मां-बाप के लिए एक 'माली' का संघर्ष; बाराबंकी में गैस सिलेंडर की किल्लत की मार्मिक तस्वीर

12, 2, 2026

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बाराबंकी (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं पर सवाल खड़े करती है। विकास खंड बंकी के तिंदोला बरेठी गांव के रहने वाले अरुण कुमार को अपने कैंसर पीड़ित पिता और पैरालिसिस (मस्तिष्क आघात) से जूझ रही मां के लिए रसोई गैस जुटाने हेतु कड़ाके की ठंड और अंधेरे में रात 3 बजे से लाइन में लगना पड़ा। 9 घंटे के लंबे इंतजार और 8 किलोमीटर पैदल चलने के बाद दोपहर 12 बजे उन्हें ईंधन नसीब हुआ।

खबर का मानवीय और व्यवस्थागत पहलू:

  • एक बेटे का 'कवच' होना: अरुण शाहजहांपुर में माली का काम करते हैं। उनके घर की स्थिति अत्यंत दयनीय है; पिता कैंसर से लड़ रहे हैं और मां बिस्तर पर हैं। दो छोटी बेटियों की पढ़ाई और पूरे परिवार की जिम्मेदारी अकेले अरुण पर है। घर में ईंधन खत्म होने की खबर मिलते ही वे काम से छुट्टी लेकर गांव भागे।

  • सप्लाई चेन में दरार: अरुण ने 4-5 दिन पहले ही सिलेंडर बुक कराया था, लेकिन होम डिलीवरी न होने और आपूर्ति में देरी के कारण उन्हें खुद एजेंसी पहुंचना पड़ा। यह घटना दर्शाती है कि डिजिटल बुकिंग के बावजूद जमीनी स्तर पर वितरण प्रणाली में अभी भी बड़ी खामियां हैं।

  • बढ़ती कीमतें और आपूर्ति का संकट: अरुण का कहना है कि गैस की बढ़ती कीमतें और आपूर्ति में देरी उनके जैसे गरीब परिवारों के लिए 'दो वक्त की रोटी' जुटाना भी मुश्किल कर रही हैं। यह वर्तमान वैश्विक ऊर्जा संकट (ईरान-इजराइल युद्ध के कारण) का सीधा असर है जो भारत के छोटे गांवों तक पहुँच चुका है।

  • प्रशासनिक हस्तक्षेप: मामला सुर्खियों में आने के बाद जिलापूर्ति अधिकारी (DSO) राकेश तिवारी ने जांच के आदेश दिए। एजेंसी ने अब अरुण को एक विशेष नंबर दिया है ताकि भविष्य में उन्हें इस तरह की प्रताड़ना न झेलनी पड़े और सिलेंडर की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

निष्कर्ष:

अरुण कुमार जैसे हजारों लोग आज आपूर्ति बाधाओं के कारण पिस रहे हैं। हालांकि उन्हें सिलेंडर मिल गया है, लेकिन यह घटना स्थानीय प्रशासन के लिए एक सबक है कि आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी या देरी को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को और अधिक संवेदनशील बनाने की जरूरत है।

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