'विश्व बंधु' की शांति पहल: पीएम मोदी ने फ्रांस, जॉर्डन, ओमान और मलेशिया के नेताओं से की बात; ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को बताया 'निंदनीय'
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'विश्व बंधु' की शांति पहल: पीएम मोदी ने फ्रांस, जॉर्डन, ओमान और मलेशिया के नेताओं से की बात; ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को बताया 'निंदनीय'

12, 2, 2026

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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी युद्ध की आग को ठंडा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक मोर्चे पर कमान संभाल ली है। गुरुवार को पीएम मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला द्वितीय, ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक और मलेशिया के पीएम अनवर इब्राहिम से लंबी बातचीत की। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी कि ऊर्जा बुनियादी ढांचे (Energy Infrastructure) पर हो रहे हमले अनावश्यक तनाव बढ़ा रहे हैं और इन्हें तुरंत रोका जाना चाहिए।

प्रमुख कूटनीतिक संदेश और विश्लेषण:

  • संवाद और कूटनीति (Dialogue & Diplomacy): पीएम मोदी ने चारों नेताओं से अलग-अलग बातचीत में एक ही मंत्र दोहराया—"युद्ध समाधान नहीं है।" उन्होंने संघर्ष को कम करने (De-escalation) के लिए कूटनीतिक रास्तों पर लौटने की आवश्यकता पर बल दिया।

  • ऊर्जा सुरक्षा पर प्रहार की निंदा: ईरान और इजराइल के बीच जारी हमलों में तेल और गैस ठिकानों को निशाना बनाए जाने पर पीएम ने गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इससे वैश्विक ईंधन आपूर्ति बाधित हो रही है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

  • ओमान और जॉर्डन का आभार: प्रधानमंत्री ने युद्ध क्षेत्र में फंसे हजारों भारतीयों की सुरक्षित वापसी में जॉर्डन और ओमान द्वारा की गई मदद की तहे दिल से सराहना की। उन्होंने ओमान की संप्रभुता के उल्लंघन की भी निंदा की, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

  • होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): भारत और ओमान इस बात पर सहमत हुए कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से व्यापारिक जहाजों का आवागमन 'सुरक्षित और निर्बाध' रहना चाहिए। दुनिया का एक-तिहाई समुद्री तेल इसी रास्ते से गुजरता है।

  • सांस्कृतिक सेतु: कूटनीति के बीच पीएम मोदी ने जॉर्डन, ओमान और मलेशिया के नेताओं और वहां की जनता को ईद-उल-फितर की अग्रिम शुभकामनाएं दीं, जो भारत के इन देशों के साथ प्रगाढ़ सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है।

रणनीतिक मायने:

28 फरवरी, 2026 को शुरू हुए इस युद्ध के बाद से पीएम मोदी अब तक लगभग सभी प्रमुख वैश्विक शक्तियों (सऊदी अरब, यूएई, इजराइल, ईरान आदि) से बात कर चुके हैं। भारत का यह संतुलित रुख उसे एक ऐसे देश के रूप में स्थापित करता है जिसकी बात युद्ध के दोनों पक्ष सुनने को तैयार हैं।

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