ऊना में 'खैर माफिया' का तांडव: झंबर पंचायत के जंगल से 1,000 बेशकीमती पेड़ साफ; ग्रामीणों ने लगाया मिलीभगत का आरोप
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ऊना में 'खैर माफिया' का तांडव: झंबर पंचायत के जंगल से 1,000 बेशकीमती पेड़ साफ; ग्रामीणों ने लगाया मिलीभगत का आरोप

12, 2, 2026

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ऊना (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में वन संपदा की बड़ी लूट का मामला सामने आया है। झंबर पंचायत के जंगलों से रातों-रात करीब 1,000 खैर के पेड़ (Acacia Catechu) काट दिए गए हैं, जिनकी बाजार में कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। इस घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है, क्योंकि ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने पहले ही विभाग को संदिग्ध गतिविधियों के बारे में आगाह किया था।

घटना के मुख्य बिंदु और प्रभाव:

  • बेशकीमती 'खैर' की लूट: खैर के पेड़ अपनी छाल और लकड़ी के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। इससे पान में इस्तेमाल होने वाला 'कत्था' तैयार किया जाता है और आयुर्वेद में इसके कसैले गुणों के कारण इसे औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है। इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से राज्य के राजस्व को भारी चपत लगी है।

  • ग्रामीणों का आक्रोश: स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जंगल बस्ती के पास होने के बावजूद माफिया इतनी बड़ी कार्रवाई कर गया और अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी। ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से 'वन माफिया और सरकारी तंत्र' के बीच मिलीभगत का संदेह जताया है।

  • जांच और कार्रवाई: घटना की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग और पुलिस की एक संयुक्त टीम ने बुधवार देर शाम मौके का मुआयना किया। ऊना के डीएफओ (DFO) सुशील राणा ने इसे एक अत्यंत गंभीर मामला बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और विभागीय जांच का आश्वासन दिया है।

  • पर्यावरण को क्षति: कभी घना दिखने वाला यह जंगल अब ठूंठों के मैदान में तब्दील हो गया है। इससे न केवल हरियाली कम हुई है, बल्कि वन्यजीवों के आवास पर भी संकट मंडराने लगा है।

खैर (Acacia Catechu) का महत्व:

उपयोगविवरण
कत्था उद्योगपान और मुखवास में अनिवार्य घटक के रूप में।
आयुर्वेदत्वचा रोगों, मसूड़ों की समस्या और पाचन में औषधि के रूप में।
आर्थिक मूल्यइसकी लकड़ी अत्यंत कठोर और महंगी होती है, जो निर्माण कार्यों में भी प्रयुक्त होती है।

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