ममता के समर्थन में उतरे केजरीवाल: भाजपा पर लगाया 'निर्वाचन आयोग' के दुरुपयोग का आरोप; दिल्ली हार का हवाला देकर साधा निशाना
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ममता के समर्थन में उतरे केजरीवाल: भाजपा पर लगाया 'निर्वाचन आयोग' के दुरुपयोग का आरोप; दिल्ली हार का हवाला देकर साधा निशाना

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली/कोलकाता: आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति अपनी एकजुटता जाहिर की है। केजरीवाल ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह निर्वाचन आयोग (EC) को एक "हथियार" के रूप में इस्तेमाल कर बंगाल चुनाव जीतना चाहती है। उन्होंने इस स्थिति की तुलना फरवरी 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनावों से की, जहाँ आप को भाजपा के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा था।

मुख्य आरोप और राजनीतिक विश्लेषण:

  • दिल्ली 2025 का संदर्भ: केजरीवाल ने दावा किया कि जिस तरह दिल्ली में मतदाता सूची से नाम हटाकर और प्रशासन का दुरुपयोग कर भाजपा ने सत्ता हासिल की, वही पटकथा अब बंगाल में दोहराई जा रही है। गौरतलब है कि 8 फरवरी 2025 को आए नतीजों में भाजपा ने 27 साल बाद दिल्ली में सत्ता वापसी की थी, जिसमें केजरीवाल, सिसोदिया और सत्येंद्र जैन जैसे दिग्गज चुनाव हार गए थे।

  • अधिकारियों के तबादलों पर रार: ममता बनर्जी ने बंगाल में 50 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों (मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी समेत) के तबादलों को "राजनीतिक हस्तक्षेप" बताया है। केजरीवाल ने इसे लोकतंत्र की बुनियाद पर हमला करार दिया है।

  • विपक्ष की गोलबंदी: केजरीवाल का यह समर्थन 'इंडिया' (I.N.D.I.A.) गठबंधन की उस भावना को बल देता है, जहाँ क्षेत्रीय दल भाजपा के 'एकल शक्ति' मॉडल के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। उन्होंने ममता बनर्जी को लोकतंत्र बचाने वाली 'योद्धा' के रूप में पेश किया है।

  • EC की कार्रवाई: निर्वाचन आयोग ने नंदिनी चक्रवर्ती (मुख्य सचिव) और पीयूष पांडे (DGP) समेत कई शीर्ष अधिकारियों को हटाकर उनके स्थान पर नए अधिकारियों की नियुक्ति की है। आयोग का तर्क है कि यह निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए एक मानक प्रक्रिया है।

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 का कार्यक्रम:

  • प्रथम चरण: 23 अप्रैल (152 सीटें)

  • द्वितीय चरण: 29 अप्रैल (142 सीटें)

  • नतीजे: 4 मई, 2026


निष्कर्ष:

अरविंद केजरीवाल का यह बयान बंगाल चुनाव को 'ममता बनाम भाजपा' के बजाय 'लोकतंत्र बनाम तानाशाही' के नैरेटिव में बदलने की कोशिश है। दिल्ली की हार के बाद, केजरीवाल अब राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा विरोधी मोर्चाबंदी को और अधिक आक्रामक बनाने के मूड में दिख रहे हैं।

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