भारत की कूटनीतिक चेतावनी: ऊर्जा केंद्रों पर हमले 'अस्वीकार्य'; पीएम मोदी ने फ्रांस, ओमान, जॉर्डन और मलेशिया से की शांति की अपील
आज की ताजा खबर
LIVE

भारत की कूटनीतिक चेतावनी: ऊर्जा केंद्रों पर हमले 'अस्वीकार्य'; पीएम मोदी ने फ्रांस, ओमान, जॉर्डन और मलेशिया से की शांति की अपील

12, 2, 2026

2

image

नई दिल्ली: ईरान द्वारा कतर के रास लाफान (Ras Laffan) एलएनजी केंद्र और इजराइल द्वारा ईरान के साउथ पार्स (South Pars) गैस क्षेत्रों को निशाना बनाने के बाद भारत ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए "अत्यंत परेशान करने वाला" और "अस्थिर" करने वाला बताया है। प्रधानमंत्री मोदी ने चार प्रमुख वैश्विक नेताओं से बात कर तनाव कम करने और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।

प्रमुख कूटनीतिक स्तंभ और चिंताएं:

  • ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर प्रहार: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि नागरिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है। इससे न केवल क्षेत्र में अस्थिरता आएगी, बल्कि पूरी दुनिया में ईंधन की कीमतों और आपूर्ति पर बुरा असर पड़ेगा।

  • मैक्रों और मोदी का साझा विजन: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और पीएम मोदी इस बात पर सहमत हुए कि तनाव कम करने के लिए 'संवाद और कूटनीति' (Dialogue & Diplomacy) ही एकमात्र विकल्प है। दोनों देश इस संकट के समाधान के लिए "घनिष्ठ समन्वय" बनाए रखेंगे।

  • ओमान की संप्रभुता का समर्थन: पीएम मोदी ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक से बात करते हुए ओमान की क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की कड़ी निंदा की। भारत ने उन हजारों भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए ओमान का आभार जताया जो युद्ध क्षेत्र से रेस्क्यू किए गए हैं।

  • होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा: भारत, ओमान और मलेशिया ने इस बात पर चिंता जताई कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में नौवहन बाधित हुआ, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है।

रणनीतिक महत्व: भारत की 'सॉफ्ट पावर' और 'हार्ड टॉक'

देशप्रमुख चर्चा का विषय
जॉर्डनमाल और ऊर्जा का निर्बाध पारगमन, ईद की शुभकामनाएं।
ओमानसंप्रभुता की सुरक्षा, भारतीयों की वापसी और सुरक्षित नौवहन।
फ्रांसवैश्विक शांति के लिए समन्वय और डी-एस्केलेशन।
मलियासाझा प्रतिबद्धता और शांति की शीघ्र बहाली।

निष्कर्ष:

भारत का यह रुख दर्शाता है कि वह अब केवल युद्ध का विरोध नहीं कर रहा, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक हितों की रक्षा के लिए मुखर होकर सामने आ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी का "भाई" और "प्रिय मित्र" जैसे शब्दों का प्रयोग इन नेताओं के साथ भारत के गहरे और व्यक्तिगत संबंधों को भी रेखांकित करता है।

Powered by Froala Editor